पीएम मोदी की वोकल फॉर लोकल की अपील को देशवासियों का मिला भरपूर साथ

कोई ये बात माने या न माने लेकिन हकीकत यही है कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से राष्ट्रभक्ति की अलख भी से तेजी से जलने लगी है। राष्ट्रहित के लिए मोदी जी जनता से आह्वान करते है और जनता उनके साथ खड़ी दिखाई देती है। पिछले 6 साल में ऐसे कई मौके आये जब इसके उदाहरण मिलते है लेकिन ज्यादा पीछे न जाकर हम अभी की बात करते है जब पीएम मोदी ने देशवासियों से वोकल फॉर लोकल सामान खरीदने का आह्वान किया और लोगों ने उनकी इस अपील पर ऐसा अमल किया कि इस दिवाली चीन को 40 हजार करोड़ का फटका लग गया।

 

चीनी सामान से भारतीय का हुआ मोहभंग

चीन से सीमा विवाद और पीएम मोदी का देश की आर्थिक व्यवस्था को कोरोना काल से उबारने के लिए दिये गये मंत्र वोकल फॉर लोकल का असर ऐसा हुआ कि इसबार त्योहारी खरीद में महज 29 फीसदी लोगों ने ही चीनी सामान खरीदने में रुचि दिखाई जिसके चलते चीन को इस साल 40 हजार करोड़ रूपये का फटका लगा। गौरतलब है कि इससे पहले रक्षाबंधन में भी चीन को 4 हजार करोड़  का नुकसान सहना पड़ा था। त्योहारी सामानों के साथ साथ चीन के खिलौनों की मांग भी इस साल लगभग खत्म हो चुकी है। भारत ने बाज़ार के लिए देश में बने अच्छे क्वालिटी के माल की सप्लाई तेज़ कर दी है। मेक इन इंडिया का मोर्चा खुलने के बाद भारतीय बाजार तो हमेशा की तरह गुलजार हैं लेकिन चीन कराह रहा है। क्योकि देशवासियों के बहिष्कार से चीनी के होश ठिकाने लगा दिये होंगे। फिलहाल ये तो अभी शुरूआत है क्योकि भारत ने पूरी तरह से बन बना लिया है कि अब देश में सिर्फ देशी सामान ही सबसे पहले खरीदा जायेगा।

पीएम मोदी ने बदला माहौल

कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद जिस तरह से पीएम मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिये आत्मनिर्भर भारत का मंत्र देश वासियों को दिया उस मंत्र का ही आज असर है कि भारत इस विपदा के बाद भी तेजी से अपनी अर्थव्यवस्था ठीक करने में लगा हुआ है। खासकर वोकल फॉर लोकल के जरिये पीएम मोदी ने हर मंच से देशवासियों से अपील की कि देश में बना सामान पहले खरीदे जिससे देश में एक तरफ उत्पादन बढ़ सके तो दूसरी तरफ भारत दूसरे देशों पर निर्भर भी कम हो सके। राष्ट्रहित में मोदी सरकार का उठाया गये इस कदम के साथ समूचा देश चल पड़ा जिसका असर ये हुआ कि देश में दिवाली के मौके पर 72 हजार करोड़ रूपये का कारोबार हुआ।

यानी ये बोला जा सकता है कि विपदा के इस दौर में न केवल भारत उबर रहा है। बल्कि नया भारत भी बन रहा है। जहां समूचा देश आत्मनिर्भर होगा और देश का हर नागरिक अपने पैरो में खड़ा होगा।

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