सेना की सख्ती से बौखलाए आतंकी इस्तेमाल कर रहे स्टील बुलेट्स – ISI कर रहा सहयोग

Terrorist Using Steel Bullets
प्रतीकात्मक तस्वीर

आतंकियों के हमले और जवानों के साथ उनके मुठभेड़ की घटनाएं कश्मीर में आम बात हो गयी है| जितनी तेजी से देश की सेना आतंकियों को ख़त्म करने के मिशन पर आगे बढ़ रही है, उतनी ही बौखलाहट के साथ आतंकी हमले के नए-नए तरीकों को अपना रहे हैं|

बीते 15 जून को भी आतंकियों ने अनंतनाग में सीआरपीएफ के जवानों पर हमला किया जिसकी जवाबी कारवाई में एक आतंकी मारा गया| जाँच से पता चला की हमले में आतंकियों द्वारा स्टील बुलेट्स का इस्तेमाल किया गया था| हमले की जगह पर भी स्टील बुल्लेट्स के कई राउंड के निशान मिले| आतंकियों के द्वारा हमले में स्टील बुल्लेट्स का इस्तेमाल देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है|

क्यों है स्टील बुलेट इतना घातक?

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प्रतीकात्मक तस्वीर

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अपने पिछले हर हमले में स्टील बुलेट्स का इस्तेमाल किया है| इन स्टील बुल्लेट्स की खास बात ये है कि ये जवानों के बुलेट प्रूफ जैकेट को भी आसानी से भेद सकती है| इन बुलेट्स का इस्तेमाल AK-47 राइफल से भी किया जा सकता है| आतंकी अपनी मैगजीन में 2-3 स्टील बुलेट का कॉन्बिनेशन रखते हैं और जरूरत पड़ने पर वह हमारे जवानों पर हमले करते हैं|

आपको बता दे कि देश में वीआईपी सुरक्षा में बुलेट प्रूफ गाड़ियों का इस्तेमाल होता है, ऐसे में आतंकियों की इस नई चाल को देखते हुए वीआईपी सुरक्षा की दोबारा समीक्षा हो रही है|

कौन दे रहा है आतंकियों को ये स्टील बुलेट्स?

दुनिया के ज़्यादातर देशों में इन स्टील बुलेट्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है| ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आतंकियों के पास ये बुलेट्स कहाँ से आ रहे हैं? सूत्रों के हवाले से ऐसा माना जा रहा है की पाकिस्तान की आईएसआई, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को चीन में बने इन स्टील बुलेट मुहैया करा रही है|

कश्मीर में तैनात एक अधिकारी से बातचीत में पता चला कि पिछले साल दिसंबर में पुलवामा में एक जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर “नूर मोहम्मद तंत्रे उर्फ़ पीर बाबा” का एनकाउंटर किया गया था| एजेंसियों को शक है कि कश्मीर में स्टील बुलेट लाने वाला कोई और नहीं बल्कि नूर मोहम्मद तंत्रे ही है| दुनिया भर में पूरी तरह से प्रतिबंधित इन स्टील बुलेट्स को पाकिस्तान चोरी से उन देशों से खरीद रहा है जो ख़ुफ़िया तरीके से इसका व्यापर कर रहे है|

सूत्रों के मुताबिक 15 जून को अनंतनाग में सीआरपीएफ पर हुए हमले के पीछे का मास्टरमाइंड आतंकी मुश्ताक़ अहमद जरगर है जो कि अल उमर मुजाहिदीन (एयूएम) नाम के संगठन का मुखिया है| आपको बता दें कि मुस्ताक वहीँ आतंकी है जिसे इंडियन एयरलाइन्स आईसी 814 की हाईजैकिंग के बदले भारत ने रिहा किया था| ज़रगर के साथ जैश के चीफ मौलाना मसूद अजहर और उमर सईद शेख को भी भारत ने रिहा किया था| ख़ुफ़िया एजेंसियों को शक है कि जरगर बालाकोट के जैश टेरर कैम्प में भी आतंकियो की ट्रेनिंग में शामिल रहा है जहाँ पर पुलवामा हमले के जवाब में भारत की सेना ने एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया था|

स्टील बुलेट्स का आतंकियों द्वारा हमले में इस्तेमाल करना एक चिंता का विषय है| ये सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि पाकिस्तान और वहां की खुफिया एजेंसी ISI आतंकियों के साथ की खुली मिलीभगत का सबूत भी है| ऐसे में भारत सरकार को कुटनीतिक और सामरिक दोनों दृष्टीकोण से आतंकियों से सख्ती से निपटना होगा और इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेकना होगा|