आतंकियों की टूटी कमर, ताकत और आर्थिक दोनों की तंगी से जूझ रहे आतंकी संगठन

Terrorist organizations

आतंकवाद एक ऐसी बीमारी है जिससे लगभग दुनिया का हर देश परेशान है| हर देश के महामहिम इस बीमारी का इलाज करना चाहते और इसको जड़ से ख़त्म करना चाहते है| वैसे तो इस बात से हम सब भी अनजान नहीं कि इस वक़्त आतंकी के बहुत से ऐसे संगठन है जो हमारे देश के कश्मीर इलाके में सक्रिय हैं और समय-समय पर आतंकवादी हमले कर जनता के दिल और दिमाग में वो अपना खौफ बनाये रखना चाहते हैं|

हाल की बात करें तो बीते 14 फ़रवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पूरा देश सहम सा गया था| हर किसी के मन में एक ही खौफ था, “जब हमारी सुरक्षा करने वाले जवान ही सुरक्षित नहीं तो आम जनता का क्या होगा|”

पर इस बार लोगो के अन्दर खौफ से ज्यादा गुस्सा और आतंकियों लिए के नफरत थी | देश का हर एक नागरिक चाहे वो कोई बुढा व्यक्ति हो, कोई जवान आदमी, या कोई बच्चा; हर कोई बस यहीं चाहता था की आतंकवाद के इस नापाक हरकत का मुहतोड़ जवाब दिया जाये, और हुआ भी ऐसा ही|

पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार से हर तरह की छुट मिलने के बाद देश की फ़ौज ने एयर स्ट्राइक जैसा कदम उठा कर, आतंकियों को उनके अंत की शुरुआत दिखा दी| 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से ही कश्मीर में सेना और पुलिस को मिली छुट, उसके बाद नोटबंदी, और अनवरत आतंक विरोधी गतिविधिओं के साथ सेना और सम्बद्ध अर्धसैनिक बालों ने आतंकी संगठनों का सफाया करने का बीड़ा उठाया है और अपने इस मिशन को कामयाब करने के लिए वो दिन रात लगे हैं|

Zakir_Moosa

हाल की बात करें तो कश्मीर में आतंकी जाकिर मूसा के खात्मे से आतंकवाद पर तगड़ी चोट हुई है। फ़ौज के इस सफलता से आतंकी संगठनों की कमर टूट गयी है| आतंकियों का हाल तो ऐसा है जैसे उनके सर से छत उड़ गयी हो और पावं तले ज़मीन खिसक गयी हो|

आतंकियों की समस्या तो देश में हुए नोटबंदी के साथ ही शुरू हो गयी थी| जब से टेरर फंडिंग पर लगाम लगी है तब से आतंकी संगठन पैसों की तंगी से जूझ रहा है, दूसरी तरफ आतंकियों के पास हथियारों का भी टोटा है| और अब आतंकी मूसा के मारे जाने के बाद कश्मीर में आतंकियों के हौसले बहुत हद तक पस्त हो गए हैं।

सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में अब भी 300 के करीब आतंकी सक्रिय हैं। इनमें सबसे ज्यादा हिजबुल मुजाहिदीन के 250 हैं। इसके बाद नंबर लश्कर-ए-तैयबा का है, जिसके करीब 30 आतंकी सक्रिय हैं। सबसे कम जैश-ए-मोहम्मद के 20 आतंकी हैं। इन तीनों ही आतंकी संगठनों के पास कश्मीर में आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए पैसों की जबरदस्त किल्लत चल रही है। आशंका तो इस बात की भी जताई जा रही है की हो सकता है आने वाले दिनों में कश्मीर में एटीएम और बैंक लूट की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

फ़ौज के आतंकवाद ख़त्म करने के मिशन को काफी हद तक सफलता मिल चुकी है| कश्मीर में सबसे अधिक सक्रिय रहने वाला संगठन हिजबुल मुजाहिदीन है, जिसके सभी बड़े आतंकी मरे जा चुके है सिर्फ एक रियाज़ नायकू बचा है| दूसरी तरफ जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क भी लगभग ध्वस्त हो चुका है। हिजबुल, जैश और लश्कर के प्रमुख आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं।

कुल मिला कर बात अब यहीं है की जिस तरीके से भारत की फ़ौज अपने मिशन पर काम कर रही है, उसे देख कर यहीं लग रहा है की बस आतंकी अपने दिन गिन रहे है| सिर्फ ताकत से ही नहीं बल्कि आर्थिक तौर से भी आतंकियों की कमर तोड़ने का पूरा काम किया जा रहा है|

सेना और सरकार का यही ज़ज्बा रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा देश एक पुर्णतः आतंकवाद मुक्त राष्ट्र होगा|