कश्मीर घाटी में आतंकी संगठन बने एक दुसरे के जान के दुश्मन

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भारतीय सेना के आतंकियों को ख़त्म करने वाले मिशन की वजह से कश्मीर घाटी में आये दिन सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की घटनायें होती रहती है| अब तक सैकड़ों आतंकियों को भारतीय सेना अंजाम तक पहुंचा चुकी है| गौरतलब है कि सेना तो आतंकियों की दुश्मन है ही, पर लगता है अब आतंकी संगठन भी एक दुसरे के दुश्मन बन चुके है|

सूत्रों की मानें तो ऐसा माना जा रहा है कि आतंकियों के अलग-अलग संगठनों के बीच वॉर की वजह विचारधारा और इज्जत बन रही है| कश्मीर में पाकिस्तानी और प्रो-पाकिस्तानी आतंकियों से परेशान घाटी के लोग उनकी जानकारी भी साझा करने लगे थे, और अब आतंक की राह पर चल चुके स्थानीय लोग भी विदेशी आतंकियों की हरकतों से परेशान हो गए हैं|

इसका प्रमाण बुधवार की रात अनंतनाग के बिजबेहारा में देखने को मिला जहाँ से सुरक्षाबलों ने आतंकियों की लड़ाई में घायल हुए एक आतंकी को अपनी गिरफ्त में ले लिया|

क्या है इस जंग की वजह

इस जंग की वजह आतंकी संगठनों की विचारधारा में मतभेद है, साथ ही विदेशी आतंकी और प्रो-पाकिस्तानी आतंकियों की हरकतों से स्थानीय लोगों का परेशान होना भी एक अहम् मुद्दा है| आईएसएचपी और एजीएच के सदस्य जो सभी स्थानीय आतंकवादी हैं, कश्मीर को एक इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते हैं और पूरी तरह से इस्लाम का अनुसरण करने की बात करते हैं| वहीँ दूसरी और हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर दोनों संगठन प्रो-पाकिस्तानी हैं जिनका मकसद है कश्मीर को पाकिस्तान में शामिल करना|

सिर्फ इतना ही नहीं इन विदेशी आतंकियों की कश्मीर में आम लोगों पर खास कर महिलाओ पर बढ़ते जुर्म के वजह से यहाँ स्थानीय आतंकी परेशान हैं| इन दोनों के बीच संघर्ष की ये भी एक वजह है|

बुधवार की रात जिसने प्रमाण दिया इस जंग का

खुफियां सूत्रों के मुताबिक हिजबुल के आतंकी जुबैर वानी और आरिफ भट, और लश्कर के आतंकी बुरहान अहमद ने आईएसएचपी के आतंकी आदिल अहमद (जो पहले लश्कर और बाद में हिजबुल में था) के लिए जाल बिछाया| उन्होंने आदिल को मिलने बुलाया और वजह दी कि वो भी हिजबुल और लश्कर से अलग होकर इस्लामिक स्टेट की मांग के साथ खड़े होना चाहते हैं और आईएसएचपी जॉइन करना चाहते हैं|

आदिल अपने दो साथियों के साथ 26 जून की रात को उनसे मिलने गया और लश्कर के तीनो आतंकियों ने उनके साथ शामिल होने की शपथ ली और फोटो भी खिंचवाई| उसके बाद आदिल ने अपने तीन साथियों में से दो को वापस भेज दिया और उसके साथ उसका साथी तुरैब वहीँ रुक गया|

इसके बाद पांचों आतंकियों ने नमाज पढ़ी और नमाज के पूरा होते ही जुबैर ने अपनी एके-47 उठाई और आदिल पर गोली दाग दी जिसकी वजह से आदिल की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि तुरैब पहाड़ी से कूद कर वहां से भागने में कामयाब हुआ| इसी अफरा तफरी में जुबैर की गोली से आरिफ भी घायल हो गया जिसे जुबैर और बुरहान वहीं छोड़कर हथियार लेकर वहां से भाग गए| आरिफ को बाद में सुरक्षा बलों ने घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया और उसकी जान बचाकर वापस लाये| सेना की कोशिश रहेगी कि पकडे गए आतंकी से जंग की सच्चाई तक पंहुचा जाये जिससे आतंक के सफाए में सेना को मदद मिले|