धारा 370 कश्मीर से हटा तो आतंकवाद घटा, 2019 के मुकाबले दो तिहाई आतंकी हमले हुए कम 

धारा 370 हटने के 2 साल से ज्यादा का वक्त हो गया है लेकिन इस पर अभी भी देश में सियासत की दुकान कुछ लोग चलाने में लगे है। ऐसे लोगों के लिये ही ये खास खबर आज हम लेकर आये हैं।अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदात तेजी से कम हो रही हैं। 2019 के मुकाबले 2021 में आतंकी हमलों और उसमें मारे जाने वाले सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या में दो तिहाई की कमी आई है।

घाटी में घटा आतंक का ग्राफ

कश्मीर में एक तरफ धारा 370 हटने के बाद विकास की नई नई गाथा लिखी जा रही है तो दूसरी तरफ आतंकवाद पर पूरी तरह से ब्रेक लगता हुआ दिख रहा है। ऐसा हम नही बल्कि सरकारी आंकड़े बता रहे है जिसे राज्यसभा में रक्षा राज्यमंत्री ने पेश किया है। सरकार की माने तो 2019 में जिस साल अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया, जम्मू-कश्मीर में 594 आतंकी हमले दर्ज किए गए थे। इन हमलों में सुरक्षा बलों के 80 जवानों की मृत्यु हुई थी। लेकिन उसके बाद आतंकी हमलों की संख्या घटकर 2020 में 244 और इस साल 15 नवंबर तक 195 रह गई है। इसी तरह आतंकी हमलों में मारे जाने वाले सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या 2020 में 62 और इस साल 23 नवंबर तक 35 रह गई है। इसके पहले 2018 में कुल 614 आतंकी हमलों में 91 जवान मारे गए थे। आतंकी हमलों में कमी के बावजूद मुठभेड़ में मारे जाने वाले आतंकियों की संख्या में ज्यादा कमी नहीं देखने को मिल रही है, जो सुरक्षा बलों की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। 2018 में मुठभेड़ में कुल 257, 2019 में 157, 2020 में 221 और इस साल अब तक 151 आतंकी मारे जा चुके हैं।

हालात सुधरने के बाद लौटने लगे हैं कश्मीरी प्रवासी

तीन दशक पहले अपने घरों को छोड़कर पलायन के लिए मजबूर किये गए कश्मीरी प्रवासी अब अपने घरों में लौटने लगे हैं। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय के अनुसार अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद अब तक 1678 प्रवासी कश्मीर में लौट चुके हैं और 151 लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन-जायदाद वापस दिलाई गई है। इतना ही नहीं सऊदी अरब सीधे कश्मीर में निवेश कर रहा है तो गांव गांव सड़कों का जाल बिछ चुका है या बिछ रहा है। अरसे बाद दुनिया में कश्मीर के सेब उड़ान योजना के चलते बाजार की रौनक बढ़ा रहे है जो ये बता रहे है कि कश्मीर अब बदल चुका है और वो भी महज सिर्फ एक धारा हटाने के चलते।

कश्मीर के लोगों का सुख कुछ कश्मीरी पार्टियों को अच्छा नही लग रहा है। ऐसी पार्टियों से घाटी में रहने वालो को सावधान रहना होगा क्योंकि वो अपनी सियासत के चलते कश्मीर में अमन नहीं चाहते है और ऐसे लोगो को हम लोगों को ही खामोश करना होगा जिससे घाटी का विकास तेजी से होता रहे।