मुस्लिम बाप-बेटे ने बिना मजदूरी १०० दिन में बनाया माता का मंदिर – धार्मिक सद्भाव की अनूठी मिसाल

आज जब देश में हिन्दू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों में फूट डालने की पुरजोर कोशिश हो रही है, ऐसे में धार्मिक सद्भाव की एक अनूठी मिसाल मदर्स डे पर मध्यप्रदेश में होशंगाबाद जिले से आयी है|

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पिता और पुत्र की जोड़ी, रहमान और रिजवान जो पेशे से राज-मिस्त्री हैं, ने इटारसी के केसला में १०० दिनों में माता के मंदिर का निर्माण कार्य पूरा किया| मंदिर निर्माण के दौरान दोनों ने एक भी दिन विश्राम नहीं किया, और बिना छुट्टी किये अनवरत काम करके माता के मंदिर का निर्माण संपन्न किया|

मदर्स डे पर स्वर्गवासी माँ को समर्पित है ये मंदिर

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पेशे से शिक्षक केसला निवासी सावित्री ने अपनी माँ की याद में ये मंदिर बनवाया| सावित्री की माँ भागवती शिवलाल ने ३५ साल पहले ईष्ट देवी सिद्धिदात्री की प्रतिमा स्थापित करके इस मंदिर की नींव रखी थी| सावित्री की माँ की इच्छा थी की यहाँ पर माता का मंदिर बने|

अपनी माँ की इच्छा पूरी करने के लिए ही सावित्री ने मंदिर बनाने का संकल्प किया और इस कार्य के लिए उन्होंने मुस्लिम पिता-पुत्र रहमान और रिजवान को चुना| मदर्स डे से पहले मंदिर पूरा होना लक्ष्य था, क्यूंकि मदर्स डे पर ही सावित्री इसे अपनी स्वर्गवासी माँ को समर्पित करना चाहती थी| कम समय होते हुए भी रहमान और रिजवान ने अपने कार्य को समय पर पूरा किया|

मंदिर बनाने में लगे समय और मेहनत के लिए कोई मजदूरी नहीं ली

काम संपूर्ण होने के बाद दोनों पिता-पुत्र ने मजदूरी लेने से इनकार कर दिया| सावित्री दोनों के इस कृत्य से इतना प्रभावित हुई की उन्होंने अपनी ६ एकड़ जमीन में से एक एकड़ जमीन दोनों पिता-पुत्र के नाम कर दी| मंदिर के उद्घाटन के दिन रहमान और रिजवान का तिलक भी किया गया|

धार्मिक सद्भाव की अनूठी मिसाल

आज जब देश में धार्मिक असहिष्णुता को हर ओर से ठेस पहुँचाने की कोशिश हो रही है, मंदिर मस्जिद के नाम पर जब देश में हिन्दू-मुस्लिम संप्रदाय में तनाव बढ़ाने की कोशिश हो रही है, ऐसे में रहमान और रिजवान जैसे भारत के नागरिकों ने धार्मिक सद्भाव की बेहतरीन मिसाल पेश की है|

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के पिछले पाँच साल के कार्यकाल में हिन्दू-मुस्लिम के बीच की खाई बहुत हद तक कम हुई है| मोदी जी ने भारत को एक असली धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के लिए हर कोशिश की है, और उसमे सफल भी रहे हैं| अगर भविष्य में ऐसे अनूठे उदाहरण और देखने को मिलें तो कोई आश्चर्य नहीं|