तीन तलाक खत्म, 370 खत्म, अब सरकार का ध्यान राम मंदिर निर्माण और समान नागरिक संहिता पर केन्द्रित

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बीते दो हफ्ते में मोदी सरकार ने जनता से किये अपने दो अहम वादों को पूरा कर दिया है, पहला तीन तलाक और दूसरा आर्टिकल 370 का अंत | आर्टिकल 370 ख़त्म करना सिर्फ भाजपा का ही नहीं बल्कि RSS का भी सबसे बड़ा एजेंडा और सबसे बड़ी डिमांड भी थी | बीते सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश करते हुए शाह ने संघ के संसथापक श्यामा मुख़र्जी का भी जिक्र किया और साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख़र्जी के विचारो को याद किया और कहा की एक देश में दो प्रधान, दो संविधान नहीं हो सकते और इसीलिए घाटी में एकता की भावना स्थापित करने के लिए आर्टिकल 370 का खत्म होना बेहद अवश्यक है |

आर्टिकल 370 पर प्रतिबंध संघ की पुरानी डिमांड

आर्टिकल 370 पर प्रतिबन्ध लगाने की संघ की डिमांड बहुत पुरानी है | इससे पहले साल 2002 में संघ ने सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के तहत धारा 370 हटाने और लद्दाख को अलग करने का प्रस्ताव तत्कालीन सरकार के सामने रखा था | संघ ने प्रस्ताव में कहा की आर्टिकल 370 कश्मीर में अलगाववाद सोच को बढ़ावा दे रहा है जो सही नहीं है | इसलिए जम्मू और लद्दाख के निवासी अलग अलग राज्य की मांग करते हैं |

सोमवार को आर्टिकल 370 को ख़त्म करने सरकार के फैसले के बाद ही संघ प्रमुख मोहन भगवत और सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी की तरफ से बयान जारी किया गया और कहा गया कि ‘सरकार के साहसपूर्ण कदम का हम हार्दिक अभिनंदन करते हैं | यह जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश के हित के लिए बहुत अधिक जरूरी था | सभी को अपने स्वार्थों और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस पहल का स्वागत और समर्थन करना चाहिए |’

अब आगे की तैयारी में भाजपा

तीन तलाक और आर्टिकल 370 पर लिए गए सरकार के बड़े फैसलों के बाद अब संघ को उम्मीद है की भाजपा अपने उन सारे वादों को पूरा करेगी और उन सभी मुद्दों पर कानून भी बनेंगे जो देश के लिए जरूरी है | संघ को उम्मीद है की सरकार जल्द ही समान नागरिक संहिता बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है | संघ के एकदूसरे नेता ने ये भी कहा की सरकार के फैसलों को देखकर ये अनुमान लगाया जा सकता है की जल ही राम मंदिर बनने का रास्ता भी साफ होगा | इसके साथ ही जनसंख्या नियंत्रण कानून के भी आने के कयास लगाये जा रहे है |