लोकसभा में तीन तलाक बिल हुआ पारित, अब राज्यसभा में पारित करने की कवायद जारी

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Triple talaq bill

तीन तलाक बिल एक ऐसा मुद्दा जो काफी सालों से चर्चा में है | मोदी की सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी दोनों सभाओ में इसे पास करवाने की काफी मशक्कत की थी हालाँकि लोकसभा में ये बिल पास भी हो गया पर राज्यसभा में पास न हो सका और इसे दोबारा संसोधन के लिए भेज दिया गया| MODI 2.0 की सरकार ने गुरुवार की सुबह लोकसभा में हुए लम्बी बहस के बाद आखिर में लोक सभा से इस बिल की मंजूरी ले ही ली हालाँकि इस बिल के रस्ते में अडचने काफी आई | संशोधनों और बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस, टीएमसी और जेडीयू के सांसदों ने वॉक आउट कर दिया |

विपक्षी सांसदों ने इस बिल के खिलाफ प्रश्नों का पूरा एक दौर चलाया पर वर्तमान में कानून मंत्री के तौर पर कार्यरत रवि शंकर प्रासद ने एक-एक सवाल का सटीक जवाब दिया और आखिर में ये बिल लोकसभा से पारित हो ही गया | अब सरकार की ये कवायद रहेगी की संसद के इसी सत्र में इसे राज्यसभा से भी पारित करवा दिया जाये ताकि जल्द से जल्द ये बिल कानून का रूप ले पाए |

तीन तलाक के बिल को लेकर कानून मंत्री ने कहा की ये बिल न तो किसी जाती से जुड़ा है न ही किसी धर्मं से और न ही राजनीती से | ये बिल सिर्फ महिलाओ के सम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया है | कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंनेये भी कहा कि 1986 में शाह बानो केस में अगर वोट बैंक से परे हट कर इस मामले के लिए कांग्रेस ने कोई शख्त कानून बनाया होता तो आज हमें इस बिल को भी लाने की जरूरत नहीं पड़ती |

‘पैगंबर साहब भी तीन तलाक को मानते थे गलत’

रविशंकर कहते है की जब 20 इस्लामिक देशों में तीन तलाक को वैध्य नहीं माना जाता है तो फिर हमारा देश तो एक धर्मं-निरपेक्ष देश है फिर इस बिल पर इतने सवाल क्यों उठाये जा रहे है | और बात अगर पैगम्बर साहब की करे तो वो भी तलाक-ए-बिद्दत को गलत मानते थे |

‘हिंदू मैरिज लॉ में भी बदलाव हुए, इस पर हंगामा क्यों?’

कांग्रेस के विरोध का सटीक जवाब देते हुए कानून मंत्री ने कहा की कांग्रेस की सरकार के समय हिंदू मैरिज लॉ एक्ट में महिलाओ की सुरक्षा के लिए कितने ही संसोधन किये गए जैसे महिला और पुरुष दोनों की शादी की उम्र तय करना, दहेज़ प्रथा पर रोक लगाना जैसे कई और पर इनपर तो कभी कोइ सवाल नहीं किया गया तो फिर जब हम मुस्लिम महिलाओ की सुरक्षा के लिए इस बिल को पास करवाना चाहते है तो इसमें इतनी अडचने क्यों |

‘डेटरेंस के लिए जरूरी है यह कानून’

तीन तलाक बिल का महत्व समझाने के लिए रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘2017 से तीन तलाक के 574 केस, सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद 345 केस, ऑर्डिनेंस के बाद भी तीन तलाक के 175 केस आए |’ और तो और एक दिन मेरे पास एक IT प्रोफेशनल की महिला अपने तीन बच्चों के साथ आई जिसके पति ने उसे तलाक दे दिया था | ऐसे में महिलाओ के सम्मान की सुरक्षा के लिए ये बिल बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है | उनका मानना है की एक बार ये बिल कानून में तब्दील हुआ तो ऐसे अपराधों में कमी आएगी | मेंटेनेंस पर उठे सवाल का जवाब देते हुए रविशंकर ने कहा की कांग्रेस वाले कहते है की क्रिमिनलाइज कर देंगे तो मैटिनंस कैसे देगा तो उस समय जब मुस्लिम पति अपने पत्नी को दहेज़ के लिए प्रताड़ित करता है और जेल जाता है तब मेंटेनेंस पर सवाल क्यों नहीं उठाये जाते |

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2017 में तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था तब मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने कहा की आप दखल न दे हम अपने समाज को समझाएंगे | पर समझाना तो दूर उलटे उन्होंने तीन तलाक बिल के खिलाफ देशभर में बैठकें शुरू कर दी | बिल को लेकर उससे जुड़े स्टेक होल्डर से बातचीत नहीं करने के विपक्ष के आरोपों पर कानून मंत्री ने कहा की ऐसा नहीं है की हमने उनसे बात नहीं की | ये बिल महिलाओ के चिन्ताओ को दूर करना के लिए है और प्रमुख तौर पर उनके विचारों का जानना ज़रूरी था | और अगर मुस्लिम समाज के नेताओं ने तीन तलाक के खिलाफ कोई अभियान चलाया होता तो मैं खुद उन्हें समझाता पर ऐसा हुआ ही नहीं |

बिल का मकसद मुलिमों को टारगेट करना नहीं है

विपक्ष के मुस्लिम को टारगेट करने वाले आरोपों का जवाब देते हुए रविशंकर ने कहा की हमारी पार्टी सिर्फ हमें वोट देने वालों के हित का बारे में नहीं सोचती | हमने हमेशा से सबका साथ, सबका विकाश पर जोर दिया है | और ये बिल किसी राजनीती, धर्म, प्रथा या समुदाय के अधीन नहीं है | इस बिल को कानून में परिवर्तित करने के पीछे एक ही मकसद है की महिलाओं के मान-सम्मान की रक्षा की जा सके |

 


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