बिना किसी पुरुष के चार महिला पायलटों की टीम ने, सबसे लंबी फ्लाइट उड़ाने का रचा इतिहास

जल हो या थल या फिर नभ, हर तरफ भारतीय महिलाओं जलवा बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय महिला हर तरफ नये नये मुकाम हासिल कर रहे है। इसी क्रम में हवाई यात्रा में नया इतिहास रचने के लिए एयर इंडिया की सिर्फ महिला पायलट वाली फ्लाइट ने उड़ान भरी । अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को से बेंगलुरु तक नॉन स्टॉप उड़ान भरने वाली ये पहली फ्लाइट है। यह उड़ान उत्तरी ध्रुव के ऊपर से होते हुए और अटलांटिक मार्ग से कर्नाटक की राजधानी पहुंचेगी

नारी शक्ति ने हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि

जैसे ही एयर इंडिया की फ्लाइट सैन फ्रांसिस्को से बेंगलुरु पहुंची, उसी के साथ भारत की वीर महिलाओं के नाम सफलता का एक नया अध्याय और जुड़ गया है। बता दें कि एयर इंडिया की सबसे लंबी सीधी रूट की उड़ान सैन फ्रांसिस्को से बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर गई है, जो उत्तरी ध्रुव के ऊपर से होते हुए पहुंची है, जिसकी दूरी लगभग 16,000 किलोमीटर की है। बड़ी बात यह है कि बिना किसी पुरुष पायलट के चार महिला पायलटों ने इस उड़ान को भरा। यह बड़ी बात इसलिए भी है क्योंकि उत्तरी ध्रुव के ऊपर से होते हुए विमान उड़ाना काफी मुश्किल होता है और विमानन कंपनियां अनुभवी पायलटों को ही इस रूट पर भेजती हैं। एयर इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, उड़ान संख्या एआइ-176 शनिवार को सैन फ्रांसिस्को से रात 8.30 बजे (स्थानीय समयानुसार) रवाना हुई और एक महिला पायलट द्वारा बताया गया कि 17 घंटों के बाद यह बेंगलुरु पहुंची।

क्रू मेंबर्स में शामिल हैं ये 4 महिलाएं

विमान के चालक दल की सदस्य हैं-कैप्टन जोया अग्रवाल, कैप्टन पापागरी तनमई, कैप्टन आकांक्षा सोनवरे और कैप्टन शिवानी मन्हास। कैप्टन जोया अग्रवाल ने कहा, आज, हमने न केवल उत्तरी ध्रुव पर उड़ान भरकर, बल्कि सभी महिला पायलटों के साथ उड़ान भरके इतिहास का निर्माण किया। हम इसका हिस्सा बनकर बेहद खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं। इस मार्ग से 10 टन ईंधन की बचत हुई है। एयर इंडिया की सैन फ्रांसिस्को-बेंगलुरु उड़ान का संचालन करने वाली चार पायलटों में से एक, शिवानी मन्हास ने कहा, ‘यह एक रोमांचक अनुभव था क्योंकि यह पहले कभी नहीं किया गया था। यहां तक पहुंचने में लगभग 17 घंटे लग गए।’ इसके साथ साथ पहली बार किसी महिला पायलट ने 30 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरी जो एक रिकार्ड बन गया है।

वैसे भी भारतीय महिलाएं लगातार इतिहास रच रही है फिर वो जल हो या नभ या फिर थल हर तरफ हर उस मुकाम को हासिल कर रही है जिसे उनके लिये नही माना जाता था। ऐसे में हर भारतीय को अब गर्व हो रहा है क्योकि भारत की छोरिया भी किसी से कम नही साबित हो रही है।

 

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