अप्रैल से टैक्स के नियमो में लागू हो जायेंगे ये बड़े बदलाव

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नए वित्त वर्ष 2019-20 का 1 अप्रैल को आगाज होने वाला है| ऐसे में आने वाला नया वित्त वर्ष 2019-20 आम जनता के लिए काफी राहत भरा खबर लेकर आया है| नए वित्त वर्ष में आम लोगो को राहत की कई नई चीजे मिलने के आसार है| जहाँ एक तरफ लोगो को इनकम टैक्स में राहत मिलेगी वही दुसरे तरफ लोगो को ईपीएफओ ट्रान्सफर के झंझट से भी निजात मिल जायेगा| लोगो के लिए एनपीएस लेना भी ज्यादा आकर्षक होगा| चूँकि अब पैसा लगाने, उस पर मिलने वाले व्याज और मैच्युरिटी पूरा होने पर मिलने वालो पैसो, तीनो पर टैक्स नहीं लगेगा| वही इसके साथ ही रियल एस्टेट, जीएसटी, बैंक, म्यूच्यूअल फण्ड से जुड़े नियमो में भी परिवर्तन होंगे| इसके अलावा पर्सनल फाइनैंस के नियमों से जुड़े कई तरह के बदलाव आगामी एक अप्रैल से लागू हो रहे हैं, जो आपकी फाइनैंशल प्लानिंग पर असर डाल सकते हैं| चलिए एक नजर डालते है होने वाले  बदलावों पर:

Income

1. पांच लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं

केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट 2019 में पांच लाख रुपये तक की टैक्सेबल आय को टैक्स फ्री कर दिया है। ऐसे में अगर आपकी आय इस दायरे में आती है, तो आपको इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं होगी।

2. स्टैण्डर्ड डिडक्शन की सीमा अब बढ़कर 50,000

आने वाले नए वित्त वर्ष में आप ज्यादा टैक्स बचा पाएंगे, क्योंकि अंतरिम बजट 2019 में केंद्र सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया है। इस तरह इसमें 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

3. दुसरे मकान के नोशनल रेंट पर अब कोई असर नहीं

केंद्र सरकार की अंतरिम बजट की घोषणा के मुताबिक, अगर आपके पास दो घर हैं और दूसरा घर खाली है, तो उसे भी सेल्फ-ऑक्युपाइड (अपने ही अंदर) ही माना जाएगा और आपको नोशनल रेंट (काल्पनिक किराये) पर टैक्स नहीं देना होगा। वर्तमान में अगर आपके पास एक से अधिक घर हैं तो उनमें से एक ही घर सेल्फ-ऑक्युपाइड और दूसरा घर किराये पर दिया हुआ माना जाता है, जिसके नोशनल रेंट पर टैक्स देना पड़ता है। लेकिन नए वित्त वर्ष में ऐसा नहीं होगा|

pension-scheme-TDS

4. टीडीएस की सीमा बढ़ाकर अब हुई 40,000

ब्याज से होने वाली आय पर स्रोत पर टैक्स की कटौती (टीडीएस) की सीमा सालाना 10 हजार रुपये से बढ़कर 40 हजार रुपये हो गई है। इससे उन वरिष्ठ लोगों तथा छोटे जमाकर्ताओं को फायदा होगा, जो बैंकों एवं डाकघरों की जमाराशि के ब्याज पर निर्भर करते हैं। अभी तक ये जमाकर्ता 10 हजार रुपये प्रति वर्ष तक की ब्याज आय पर कटे कर का रिफंड मांग सकते थे।

5. जीएसटी घटने से अब घर खरीदना होगा आसान

नए वित्त वर्ष के शुरुआत होते ही जीएसटी के नए दरें लागु होंगी|अब अंडर कंस्ट्रक्शन मकानों पर 12 फीसदी की जगह महज 5 फीसदी ही टैक्स लगेगा| जबकि अफोर्डेबल हाउस पर 1 फीसदी जीएसटी होगी|

6. इन्ट्रेस्ट रेट अब एक्सटर्नल बेंचमार्क से तय होगा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और एमएसएमई कर्ज पर ‘फ्लोटिंग’ (परिवर्तनीय) ब्याज दरें एक अप्रैल से रेपो रेट या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर प्रतिफल जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध कर दिया है। फिलहाल, बैंक अपने कर्ज की दरों को प्रधान उधारी दर (पीएलआर), मानक प्रधान उधारी दर (बिपिएलआर), आधार दर तथा अपने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एम्सिएलआर) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं।

7. नए वित्त वर्षो में फिजिकल शेयरों का ट्रांसफर नहीं

वैसे लोग जिनके पास लिस्टेड कंपनियों के शेयर फिजिकल फॉर्म में हैं, वे एक अप्रैल के बाद उन्हें न तो ट्रांसफर कर पाएंगे और न ही बेच पाएंगे। जबकि इससे पहले यह सीमा 5 दिसंबर, 2018 थी। जून में सेबी ने लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट्स (एलओडीआर) रेग्युलेशंस में बदलाव किया था। जिसके मुताबिक, अभी 3.33 लाख करोड़ या देश में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप का 2.3 फीसदी हिस्सा फिजिकल शेयरों के रूप में है। कई निवेशकों, खासतौर पर बुजुर्गों को ऐसे में अब फिजिकल शेयरों को डीमैट फॉर्म में बदलना पड़ेगा, तभी वे उन्हें ट्रांसफर कर पाएंगे या बेच पाएंगे।

8. अब आपका पीएफ ऑटोमेटिक हो जायेगा ट्रांसफर

नए वित्त वर्ष में आपका पीएफ अपने आप खाते में खुद ट्रांसफर हो जायेगा| जबकि अभी सदस्यों को पीएफ ट्रांसफर करने के लिए अलग से आवेदन देना पड़ता है|

9. अब रेलवे के दो पीएनआर को एक साथ लिंक कर पायेंगे

आने वाले 1 अप्रैल से कनेक्टिंग ट्रेन छूटने पर टिकट की रकम वापस कर दी जायेगी| ऐसे में आप आसानी से रेलवे के दो पीएनआर लिंक कर पायेंगे|

10. कम्पोजिशन स्कीम की भी लिमिट बढ़ी

नए वित्ते वर्ष के आगाज के साथ ही कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ कर 1.5 करोड़ के टर्नओवर तक होगी. ऐसे में उन्हीं का निबंधन होगा, जिनका सालाना टर्नओवर 40 लाख होगा|


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