त्रेतायुगकी तरह सजेगी आयोध्या कलयुग में

बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।।1।। बीथीं सकल सुगंध सिंचाई। गजमनि रचि बहु चौक पुराईं।।…