भारत की सराहना मे स्विट्ज़रलैंड के आल्पस पर्वत पर लहरा तिरंगा

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के खतरे से जूझ रही है। इसके चलते हमारे देश में लॉकडाउन जारी है, जिसकी वजह से लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। कोरोना के संकट को देखते ही भारत सरकार ने जिस तेजी से निर्णय लिए, उसकी प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संगठन भी कर चुके हैं।  

स्विट्जरलैंड का अलग अंदाज

कोरोना से लड़ने के भारत के तरीके की दुनियाभर में सराहना हो रही है। स्विट्जरलैंड ने भी भारत की प्रशंसा की है, हालांकि उसका तरीका थोड़ा अनूठा रहा। दरअसल स्विट्जरलैंड ने आल्प्स के मैटरहॉर्न पर्वत पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की रोशनी की।

इस रोशनी के जरिए स्विजट्जरलैंड ने कोरोना महामारी से जीतने की उम्मीद और जज्बे का संदेश दिया है। स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास ने इस फोटो को ट्विटर पर शेयर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि पूरी दुनिया कोविड-19 से लड़ाई में एकजुट है। मानवता निश्चित रूप से इस महामारी से जीतेगी।

स्विट्जरलैंड के मशहूर लाइट आर्टिस्ट गेरी हॉफस्टेटर ने 14,690 फीट के पहाड़ को तिरंगे के आकार में रोशनी दी थी। बता दें कि इस पहाड़ पर 24 मार्च से कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए हर दिन अलग-अलग देशों के झंडों को दर्शाती हुई रोशनी की जाती है।

बुधवार से क्रमश: इस पहाड़ पर स्विट्जरलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली और स्विस क्षेत्र टिसिनो के झंडों को दर्शाती हुई रोशनी की जा चुकी है। गेरी हॉफस्टेटर ने बताया कि प्रकाश का मतलब आशा और उम्मीद होता है।

गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड में अब तक 18,000 से अधिक लोग संक्रमित पाए गए हैं जबकि 430 लोगों की जान भी जा चुकी है। इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने स्कूल, बार, रेस्तरां और गैर जरूरी चीजों की दुकानें बंद कर दी हैं।

‘स्टे होम’ का संदेश भी दे चुका है पर्वत

इटली-स्विट्जरलैंड की सीमा पर मौजूद 4478 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद इस पर्वत के जरिये गैरी पहले भी ‘स्टे होम’ का संदेश दे चुके हैं। स्विट्जरलैंड में 19 अप्रैल को लॉकडाउन समाप्त हो रहा है। गैरी का लक्ष्य इस अवधि तक देश की इमारतों, स्मारकों और पर्वत के जरिये लोगों को कोरोना से लड़ने का संदेश देना है। इसी के तहत उन्होंने तिरंगे को पर्वत पर जगह दी।