मोदी के सत्ता में वापसी के साथ ही स्विस बैंक में काला धन रखने वालों पर कसा शिकंजा

मोदी और उनका मंत्रिमंडल पहले ही दिन से एक्शन मोड में है| उनका जोश और जज्बा देख कर ये लग रहा है कि मानों पिछले कार्यकाल में जो भी काम अधूरे रह गए थे उनको जल्द से जल्द पूरा करना है| जनता इस बात से काफी खुश है| अगर आपको पिछला कार्यकाल याद हो तो प्रधानमन्त्री मोदी ने काला धन देश में वापस लाने की बात कही थी और कुछ हद तक इस मुद्दे पर सफलता भी मिली जिसके परिणाम में कितने ही घोटालेबाजों के नाम बाहर आये|

इस बार लगता है कालाधन के मुद्दे को जड़ से ख़त्म करने की पूरी तैयारी कर ली गयी है| तभी तो PM मोदी के सत्ता में वापस आते ही स्विट्जरलैंड ने भी अपने यहां बैंकों में पैसा रखने वाले भारतीयों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है| स्विट्जरलैंड ने स्विस बैंकों में संदिग्ध धन रखने वाले भारतीय खाता धारकों पर कार्रवाई के लिए भारत के साथ संबंधित सूचनाएं साझा करने की प्रक्रिया तेज कर दी है|

Swiss Bank 1

आपको बता दे की गुप्त तरीके से या गलत तरीके से कमाई गई धन राशी जिस पर सरकार को टैक्स नहीं चुँकाया  गया हो, ब्लैक मनी कहलाता है| इसे जमा करने के लिए सबसे सुरक्षित जगह स्विट्ज़रलैंड का स्विस बैंक माना जाता है| स्विटजरलैंड अपने बैंकों में खाते रखने वाले ग्राहकों की गोपनीयता बनाये रखने को लेकर जाना जाता रहा है| पर कर चोरी के बढ़ते मामलों में वैश्विक स्तर पर हुए समझौते के बाद अब जानकारियां सुरक्षित नहीं है| संदिग्ध खाताधारकों की सूचनाओ को साझा  करने को लेकर स्विट्ज़रलैंड ने भारत समेत कई अन्य देशों से भी समझौता किया है|

स्विटज़रलैंड ने पिछले ही हफ्ते करीब एक दर्जन भारतीयों को इस संबंध में नोटिस थमाया है| सूत्रों की मानें तो स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने मार्च से अब तक स्विस बैंकों के भारतीय ग्राहकों को कम से कम 25 नोटिस जारी कर भारत सरकार के साथ उनकी जानकारी साझा करने के खिलाफ अपील का एक आखिरी मौका दिया गया है| नोटिस के अनुसार सम्बंधित ग्राहकों को 30 दिन के अन्दर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपील करने के लिये उपस्थित होना होगा और साथ ही उनके खाते से जुडी जानकारी भारत सरकार से क्यों न साझा की जाये इसका जवाब भी देना होगा |

स्विट्ज़रलैंड सरकार ने गज़ट के द्वारा जारी की गई सार्वजनिक जानकारियों में स्विस बैंक खताधारकों का पूरा नाम न बताकर सिर्फ उनके नाम का पहला अक्षर, उनकी राष्ट्रीयता और उनके जन्मतिथि को ही साझा किया है | गजट के अनुसार, सिर्फ 21 मई को 11 भारतीयों को नोटिस जारी किये गये हैं|

स्विस अधिकारियों ने जिन दो भारतीयों का पूरा नाम लिखा है उनके नाम हैं मई 1949 में पैदा हुए कृष्ण भगवान रामचंद और सितंबर 1972 में पैदा हुए कल्पेश हर्षद किनारीवाला| हालांकि, इनके बारे में अन्य जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया है|

अन्य नामों में जिनके शुरुआती अक्षर बताये गये हैं उनमें 24 नवंबर 1944 को पैदा हुईं मिसेज एएसबीके,  नौ जुलाई 1944 को पैदा हुए मिस्टर एबीकेआई, दो नवंबर 1983 को पैदा हुईं श्रीमती पीएएस,  22 नवंबर 1973 को पैदा हुईं श्रीमती आरएएस, 27 नवंबर 1944 को पैदा हुए एपीएस, 14 अगस्त 1949 को पैदा हुईं श्रीमती एडीएस, 20 मई 1935 को पैदा हुए एमएलए, 21 फरवरी 1968 को पैदा हुए मिस्टर एनएमए और 27 जून 1973 को पैदा हुए मिस्टर एमएमए शामिल हैं|

गौरतलब बात ये है की कालाधन का देश में वापस आना अपने आप एक बड़ी सफलता होगी | क्योंकि ऐसा होने से देश की सबसे बड़ी समस्या ख़त्म हो जाएगी|

अब देखना ये है की इस बार मोदी काला धन कितनी जल्दी वापस ला पाते हैं|