स्वीडन का शाही जोड़ा भारत के पांच दिवसीय दौरे पर, PM मोदी और राष्ट्रपति से की मुलाकात

King Carl XVI king of a worlds most peaceful country will meet with President Ram Nath Kovind

स्वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ तथा रानी सिल्विया सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आमंत्रण पर पांच दिन की भारत यात्रा पर आज सवेरे नई दिल्ली पहुंचे। भारत यात्रा पर आए स्वीडन राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ का राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत किया गया। उनको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उनका स्वागत किया। राजा गुस्ताफ दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। स्वीडन नरेश की यह तीसरी भारत यात्रा है।

PM  Modi  held useful discussions with King Carl

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में स्वीडन के नरेश कार्ल गुस्ताफ के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इस बैठक का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

Sweden's Royal Couple meets jai shankar

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शाही दम्पत्ति से मुलाकात की। उन्होंने आपसी संबंध बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। शाही दम्पत्ति का मुंबई और उत्तराखंड जाने का भी कार्यक्रम है। पांच दिसंबर को स्वीडन के शाही दंपती हरिद्वार में होंगे। यहां के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने न्यौता दिया है। यहां स्वीडन के राजा-रानी नवनिर्मित 14 एमएलडी के सीवर शोधन संयंत्र का लोकार्पण करेंगे।

भारत और स्वीडन के बीच तीन अरब 37 करोड़ डॉलर का व्यापार होता है। दोनों देशों के बीच लोकतंत्र, पारदर्शिता, अधिकारों की स्वतंत्रता और कानून के शासन के सिद्धान्तों पर आधारित दोस्ताना संबंध हैं। राजनीति, कारोबार, विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र मे नियमित रूप से विचारों के आदान प्रदान से भारत और स्वीडन के रिश्तों को गति मिली है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के क्रम में कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए जा सकते हैं।

बता दे कि स्वीडन के राजा की ये यात्रा उस समय हो रही है जब 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के बाद स्वीडन ने मोदी सरकार से वहां की स्थिति पर कई सवाल पूछे थे।

जर्मनी और फिनलैंड के बाद स्वीडन ही यूरोपियन यूनियन का देश है जिसने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर सवाल उठाए थे और इसपर भारत का रुख जानने की कोशिश की थी। जानकार मानते हैं कि 1980 के दशक के दौरान बोफोर्स घोटाले के बाद से स्वीडन और भारत के रिश्तों में एक दूरी बनती चली गई। इसके बाद पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत-नोर्डिक समिट में स्वीडन गए थे। पिछले 30 सालों में वहां की यात्रा करने वाले वो पहले प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले 1988 में राजीव गांधी ने स्वीडन की यात्रा की थी।

2010-12 के दौरान स्वीडन में रहे भारतीय राजदूत अशोक साजनहार ने कहा कि स्वीडिश सरकार भारत को ग्रीपन फाइटर्स बेचने के लिए काफी गंभीर है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों के भी आगे बढ़ने के आसार हैं।

गौरतलब है कि भारत में अभी स्वीडन की 200 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं और दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। भारत में स्वीडन के व्यापार दूत एंडर्स विकबर्ग ने बताया कि स्वीडन की कंपनियों के जरिये भारत मंं रोजगार के अवसर तथा निवेश में पिछले दो साल में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

उल्लेखनीय है कि चीन और जापान के बाद भारत स्वीडन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। हाल ही में स्वीडन की मीडिया सेवा कंपनी स्पॉटिफाइ ने भी यहां कारोबार की शुरुआत की।