सर्जिकल स्ट्राइक: सेना की शौर्य गाथा जिसने हर देशवासी का सिर फ़क्र से ऊँचा कर दिया

साल 2016 में, 28 और 29 सितंबर की रात को भारतीय सेना ने सीमा पार करकेपाकिस्तान अधिक्रत कश्मीरकी जमीन पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। जिससे दुश्मन को हमारी सेना का हौसला पता चल गया होगा कि वो कुछ भी कर सकती है।

मोदी सरकार के आने से पहले पाकिस्तान की मदद से आंतकी हमारे देश मे हमला करते थे और हमारी सरकार सिर्फ उन हमलो की निंदा करके अपना काम खत्म समझ लेती थी लेकिन पीएम मोदी के सत्ता संभालने के बाद साफ हो गया था कि अब भारत वो देश नही जो आंतकी हमलो को सहन करेगाऔर कुछ ऐसा ही उरी मे सेना के जवानो के कैंप मे हुए आतंकी हमले के बाद हुआ। भारत की सेना ने वो कर के दिखाया जो पाकिस्तान ने सपने मे भी नही सोचा था।

दो साल पहले देश के जाबांजजवानों ने एक ऐसी गाथा लिखी जिससे देश के हर शख्स का सिरफर्क से ऊँचा हो गया थाIपाकिस्तान की सीमा मे घुस कर न सिर्फ आंतकियों का नाश किया बल्कि पाकिस्तान को इसकी जानकारी भी दी। सेना के ऐसे शौर्य को देश सलाम कर रहा है। 

वैसे 1965,1971 और 1999 के हुए युद्ध की जीत का जश्न हर साल बबड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन, इस बार ये पहला मौका होगा, जब पूरा देश एक साथ मिलकर, दो साल पहले हुई सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी यादों को ‘पराक्रम पर्व’ के तौर पर मनाया जा रहा है.28 सितम्बर से लेकर 30 सितम्बर तक यानी तीन दिनों तक देश के 51 शहरों की 53 अलग-अलग जगहों पर भारतीय सेना के शौर्य और सर्जिकल स्ट्राइक की महत्वपूर्ण घटना को एक पर्व के तौर पर मनाया जाएगा। इस दौरान लोगों को भारतीय सेना के अभूतपूर्व काम और उनकी कार्यशैली के बारे में जानकारी दी जाएगी।

हालाकि विपक्ष इसपर सवाल खड़ा कर रहा है और इस पराक्रम पर्व को सरकार का ड्रामा बता रहा है लेकिन सच तो ये है कि पहली बार जंग के असल हीरो से आप रूबरू होगें और बदलते हुए भारत की तस्वीर भी देखेगें जो न आँख उठाकर बात करता है और न आँखझुकाकर बात करता है, वो सिर्फ आंख मे आंख डालकर बात करता है।