राम मंदिर निर्माण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष के वकील की अपील, मामले की रोजाना सुनवाई के अपने फैसले पर अटल सुप्रीम कोर्ट

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Supreme court adamant on its decision of daily hearing

अयोध्या जन्मभूमि राम मंदिर निर्माण पर 1 अगस्त को मध्यस्थता को भंग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की रोजाना सुनवाई का फैसला सुनाया था | इस फैसले के तहत इस मामले की सुनवाई 6 अगस्त से रोजाना यानि की हफ्ते के तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को तय की गयी थी पर बाद में इस मामले की महत्ता को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तय किया की अब इस मामले की सुनवाई हफ्ते के तीन दिन नहीं बल्कि पांच दिन की जाएगी |

पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विरोध जताया और कहा की इस मामले की सुनवाई हफ्ते में पांच दिन करने के अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट एक बार और सोचे | धवन ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया की वो इस मामले में पाँच दिन सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करे | धवन का कहना है की अगर इतनी तेज सुनवाई हुई तो उनके लिए न्यायालय में पैरवी कर पाना संभव नहीं होगा | साथ ही उन्होंने ये भी कहा की मामले की रोजाना सुनवाई उनके लिए टॉर्चर है |

पर सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील को ख़ारिज करते हुए अपने फैसले पर अटल रहने का निर्णय लिया | कोर्ट ने कहा की इस मामले में जो पहले तय हुआ है उसी के हिसाब से मामले की सुनवाई हफ्ते के पांच दिन ही होगी | साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा की अगर मुस्लिम पक्ष के वकील को आराम चाहिए तो मिड-वीक ब्रेक दिया जाएगा लेकिन बेंच अपनी सुनवाई जारी रखेगी |

धवन ने कोर्ट से की गयी अपील में कहा था इस मामले में पांच दिन सुनवाई का कोर्ट का फैसला अमानवीय है | उन्होंने कहा की हमें मामले से जुड़े अनुवाद के कागज पढ़ने और अन्य तैयारियाँ करनी पड़ती हैं जिसके लिए दिन रात का समय लग जाता है | ऐसी परिस्थति में अगर रोजाना सुनवाई हुई तो दलील पेश करने में दिक्कते आएँगी | और हो सकता है की इन सभी परेशानियों के वजह से उन्हें केस भी छोड़ना पड़े |

अब भाई धवन जी क्या आप ही जो अकेले अपने पक्ष की दलील पेश कर रहे है |आपके विरोधी पक्ष के वकील को भी तो दलील पेश करनी है तो परेशानी तो उन्हें भी आनी चाहिए पर उन्हें तो सुप्रीम कोर्ट के रोजाना सुनवाई के फैसले से कोई आपत्ति नहीं है |

 


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