अचानक, पीएम मोदी के अटैक के आगे बिखर क्यों जाता है देश का विपक्ष?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति की अपनी एक अलग शैली है। अक्सर उनके पॉलिटिकल मूव चौंकाने वाले होते हैं। ये अचानक चौंकाने वाला भाव उनकी पॉलिटिक्स की यूएसपी है। उनके हमले भी चौंकाने वाले होते हैं। विपक्ष को संभलने का मौका नहीं मिलता। आर्टिकल 370 को बेअसर करते वक्त भी उन्होंने ऐसा किया। बुधवार को कोरोना पर हुई मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग में भी उन्होंने कुछ-कुछ ऐसा किया। बैठक देश में कोरोना के हालात पर चर्चा के लिए थी, लिहाजा किसी ने नहीं सोचा होगा कि पीएम बड़ी चतुराई से पेट्रोल-डीजल पर राज्यों की तरफ से वसूले जा रहे टैक्स का मसला उठा देंगे। विपक्ष शासित राज्यों का बाकायदे नाम लेकर आम जनता को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत नहीं देने के लिए कठघरे में खड़ा कर देंगे। पीएम मोदी का ये अटैक अचानक और अप्रत्याशित था।

विपक्ष को नहीं मिलता संभलने का मौका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नवंबर में दिवाली से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल पर क्रमशः 5 और 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम कर दिया। इससे राज्यों पर भी टैक्स कम करने का दबाव पड़ा। एक-एक करके बीजेपी शासित राज्यों ने भी अपने-अपने यहां पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटा दिया जिससे विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों पर टैक्स कम करने का दबाव और ज्यादा बढ़ गया। नवंबर को बीते एक अरसा हो गया था लेकिन पीएम मोदी ने कोरोना पर होने वाली बैठक में अचानक विपक्ष शासित राज्यों से पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने की अपील करके उन्हें हक्का-बक्का कर दिया।

काउंटर करने में विपक्ष को लगता है वक्त

पेट्रोल-डीजल पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गैरबीजेपी शासित राज्यों में ज्यादा टैक्स का मसला उठाया तो विपक्ष को काउंटर के लिए कुछ सूझा ही नहीं। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को तो प्रतिक्रिया देने में पूरे 24 घंटे का वक्त लग गया। तो वही दूसरी पार्टी मोदी जी के हमले का कोई ठोस जवाब देने में अभी भी असमर्थ ही नजर आ रहे है। यही वजह कि ईधन के दामों में इजाफे पर एक बार फिर से विपक्ष बैकफुट में आ गया है। और उसके धरने प्रदर्शन सिर्फ नौटकी दिखाई दे रहे है और पीएम मोदी विपक्ष को मात देते हुए दिखाई दे रहे है। जबकि ऐसा बहुत कम होता है कि पेट्रोल के मुद्दे पर सत्ता पक्ष विपक्ष पर भारी पड़े, ये हुआ है तो सिर्फ मोदी जी की सियासी चालो के चलते हुआ है।

पीएम मोदी का विरोधियों पर अटैक भले ही अचानक और अप्रत्याशित होता है लेकिन इसका मतलब बिना सोचे-विचारे कतई नहीं है। प्रधानमंत्री बहुत सोच-विचार के बाद नाप-तौल कर अटैक करते हैं, बस टाइमिंग का एलिमेंट चौंकाने वाला होता है।