मोदी जी का ऐसा वॉर दुश्मन हुआ निढ़ाल

कहते है सांप भी मर जाये लाठी भी न टूटे, कुछ इसी तरह पीएम मोदी भारत के दुश्मन पाक और चीन पर वार करने में लगे हैं। एक तरफ भारत अपनी शक्ति हर दिन बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ ऐसे देशों से दोस्ती बढ़ा रहा है जो कभी पाक और चीन के काफी करीब रहते थे। दूसरी तरफ  पाकिस्तान को लगता था कि मुस्लिम देशों की ताकत से वो हिंदुस्तान को डरा लेगा लेकिन इजरायल और यूएई की दोस्ती से भारत यूएई के और करीब आ गया है। पाकिस्तान इस बात से परेशान है जिस देश के कर्जे से वो अपना देश चलाता था, वो देश अब भारत का पक्का दोस्त बन गया है।उधर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत का क्वैड वैसे ही चीन की गले की फांस बना हुआ है। चीन और पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि भारत की शक्ति हर दिन बढ़ती कैसे जा रही है।

पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी

इजरायल और यूएई की दोस्ती से पहले से पाकिस्तान परेशान था कि अब इजरायल के राजदूत का बयान उसकी परेशानी में जले में नमक का काम कर रहा है। इजरायली राजदूत रॉन ने भारत, इजरायल और यूएई के बीच त्रिपक्षीय संबंधों की बात कह दी है। ये बात इमरान को त्रिशूल की तरह चुभ रही है। दरअसल भारत और इजरायल कितने अच्छे दोस्त हैं ये पूरी दुनिया जाती है। भारत और इजरायल के बीच रक्षा और तकनीक संबंधी सौदे भी होते हैं। दूसरी ओर यूएई के साथ भी भारत के अच्छे व्यापारिक संबंध है। ऐसे में इजरायल, यूएई और भारत साथ आ गए तो ये पाकिस्तान के लिए एक खतरे की घंटी होगी क्योकि अरब देशों में यूएई को सुपर पावर की तरह देखा जाता है। हाल फिलहाल के दिनों में उसके भारत से संबंध भी बेहतर हुए हैं। संबंधों की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 370 के मसले पर पाकिस्तान के सवालों पर यूएई ने उसे भारत का आंतरिक मसला बताया था। सिर्फ यही नहीं भारत के खिलाफ पाकिस्तानी बयानबाजी को देखते हुए यूएई ने उससे अपना 1 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांग लिया था। उस वक्त भी पाकिस्तान बेहतर समझ गया था कि ये भारत यूएई के संबंधों का नतीजा है यह।

नरेंद्र मोदी के प्रयासों ने बढ़ाई नजदीकी

पीएम मोदी अच्छी तरह से ये जानते है कि पाकिस्तान को अगर सबक सिखाना है तो उसे मिल रही मदद को रोकना बहुत जरूरी होगा और कही न कही मोदी जी इस काम को पूरा करने में सफल भी हो रहे है। पहले यूरोप के देशों ने पाक को आर्थिक मदद बंद की तो दूसरी तरफ अमेरिका ने हाथ खड़े करने के बाद यूएई एक देश था जो पाक को आर्थिक मदद कर रहा था लेकिन मोदी जी की कूटनीति का असर अब ये हो रहा है कि यूएई भी पाक की मदद करने में हिचकिचा रहा है। साल 2015 में नरेंद्र मोदी ने यूएई का दौरा किया था। उस वक्त भारतीय प्रधानमंत्री का यूएई जाना काफी अहम बात थी क्योंकि कई सालों बात कोई भारतीय पीएम पहुंचा था। दोस्ती की इस पहल पर यूएई ने भी दो कदम बढ़ाए। साल 2017 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद भारतीय गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। जिसके बाद दोनो देशों के रिश्ते काफी अच्छे होते जा रहे है। इसी तरह चीन के खिलाफ पीएम मोदी मोर्चा बनाने में सफल हो चुके है। जिस तरह क्वैड देशों के साथ मिलकर चीन को आर्थिक सामरिक तौर पर झटके दिये जा रहे है उससे साफ लगता है कि चीन कही न कही इन देशों के आगे कमजोर हो रहा है और ऐसा सिर्फ पीएम मोदी की कोशिशो का ही नतीजा है।

अब इस बात को मान लेना चाहिये कि मोदी जी एक ऐसे नेता है जिनके वार में दुश्मन बेहाल हो जाता है। इसकी बानगी पहले पाक के रूप में तो अब चीन की दादागिरी खत्म करने के रूप में देखने को मिल रही है।

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