स्वदेशी क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ का सफल परीक्षण

Successful test of indigenous cruise missile 'BrahMos'

रक्षा विकास एवं अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सोमवार को सफल परीक्षण किया गया। इस मिसाइल का आज सुबह 10.20 बजे चांदीपुर से सफल परीक्षण किया गया। बता दें कि ये एक ऐसी क्रूज मिसाइल है जो जल, थल और वायु से दागा जा सकता है। कहा जा रहा है कि इसकी मारक क्षमता अचूक है। सूत्र ने कहा कि 290 किमी की मारक क्षमता वाली मिसाइल को जमीन से और समुद्र आधारित प्लेटफार्मों से दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ध्वनि के वेग से करीब तीन गुना अधिक 2.8 मैक गति से लक्ष्य पर प्रहार करती है। इसके दागे जाने के बाद दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता है।

इस सफल मिशन के साथ भारत के रक्षा स्वदेशीकरण ‘मेक इन इंडिया‘ कार्यक्रम को बढ़ावा मिल रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, डीआरडीओ के अध्यक्ष जी सथीस रेड्डी और महानिदेशक मिसाइलों और सामरिक प्रणालियों एमएसआर प्रसाद ने टीम डीआरडीओ और ब्रह्मोस को सफल मिशन के लिए बधाई दी। डीजी ब्रह्मोस सुधीर कुमार मिश्रा, निदेशक दशरथ राम और बीके दास, निदेशक ITR ने लॉन्च स्थल पर पूरे मिशन को देखा और सफल उड़ान परीक्षण को एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया।

ब्रह्मोस मिसाइल को डीआरडीओ ने रूस स्थित रॉकेट डिजाइन ब्यूरो एनपीओएम के साथ मिलकर विकसित किया है।

आने वाले दिनों में भारत और रूस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रेंज को 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 600 किलोमीटर करने की दिशा में काम करेंगे। इससे न केवल पूरा पाकिस्तान इस मिसाइल की जद में होगा बल्कि कोई भी टारगेट पलभर में इस मिसाइल से तबाह किया जा सकेगा।