विरोध के वायरस को छात्रों का मुंह तोड़ जवाब

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पिछले कुछ दिन से देशभर में NEET-JEE परीक्षा को लेकर खूब हंगामा देखा जा रहा था, हंगामा इस बात पर हो रहा था, कि परीक्षा करवाई जाये या नही, इसको लेकर कई तरह के तर्क थे। लेकिन 1 सितंबर को हुई परीक्षा में आये छात्रों ने ये साफ कर दिया कि सरकार का फैसला बिलकुल ठीक था, क्योकि परीक्षा देने आये छात्र इस फैसले के साथ खड़े दिखे।

सरकार को मिला छात्रों का साथ

NEET-JEE परीक्षा का बहिष्कार कर रहे लोगो के मुंह में उस वक्त जोरदार तमाचा पड़ा जब 1 सितंबर को छात्र खुलकर परीक्षा देने आये। ये जरूर था कि कुछ छात्र पहले कोरोना से भयभीत दिख रहे थे, लेकिन परीक्षा केंद्र की व्यवस्था को देखकर उनके चेहरे खिल उठे। जिसका असर ये हुआ कि देश के 660 जगहो पर बनाए गये केंद्रों में साढ़े आठ लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी। परीक्षा केंद्रों पर बिल्कुल अलग ही माहौल नजर आया। हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का कड़ाई से पालन हुआ। छात्रों को दूर-दूर बिठाया गया। ज्यादातर का कहना था कि इम्तिहान जरूरी थे, वरना एक साल खराब हो जाता। कुछ छात्रों के साथ आये अभिभावक भी सरकार की बनाई गई व्यवस्था से खुश नजर आ रहे थे। उनका कहना था, कि सरकार ने जो वायदा किया उसपर वो पूरी तरह से खरी उतरी है।

विरोध की आग कौन लगा रहे थे?

अब सवाल उठता है, कि वो कौन लोग थे, जो इस परीक्षा का विरोध कर रहे थे? क्या वो छात्र ही थे, या कोई और थे? निश्चित रूप से उनमें कई छात्र भी रहे होंगे। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना वायरस के कारण कई छात्रों की तैयारियों पर खराब असर पड़ा है। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि परीक्षा ही न कराई जाए।  लेकिन ऐसे में अब छात्रों को तय करना चाहिए की कौन उनके भविष्य को लेकर सजग है और कौन सिर्फ उनके नाम पर सियासत करना चाहता है। तभी तो छात्रों का हित ध्यान में रखकर सरकार ने परीक्षा करवाई तो छात्रों को दिक्कत न हो इसका भी ध्यान रखा। वैसे मोदी सरकार पिछले 6 साल से छात्रों का विशेष ध्यान भी रखने का काम कर रही है। तभी तो उनके लिए नये नये नियम बनाकर रोजगार आसान कर रही है। इसी क्रम में तो सरकार ने अभी कुछ दिन पहले ही रेलवे, बैक सहित कई परीक्षा तरह की एक ही परीक्षा करवाने का फैसला लिया है जिससे छात्रो को आर्थिक तौर पर कम पैसा खर्च करना पड़े। किसी भी छात्र के जीवन में उसकी पढ़ाई-लिखाई और उसके बाद रोजगार पाने से बढ़कर कुछ नहीं होता। शायाद मोदी सरकार ये बात अच्छी तरह से जानती है। तभी सही वक्त पर छात्रों के हित को ध्यान में रखकर फैसला लेती है।

अब ऐसे में हमारी भी जिम्मेदारी बनती है, कि हम सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने वालो के साथ न खड़े हो जाए क्योकि उनका तो बस एक काम है, कि कोई भी अच्छा काम हो तो उसमे कुछ न कुछ खामिया निकालो और काम को होने से रोको। इसलिये स्पीड ब्रेक बनने वाली व्यवस्था को अब हमे ही उखाड़ फेकना होगा जिससे हमारा देश तेजी से आगे बढ़ सके।


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