तांडव मचाने वाले दंगाइयों पर हो सख्त से सख्त कार्यवाही, नहीं होनी चाहिये केवल सियासी खानापूर्ति

एक कहावत है ना रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था कुछ ऐसा ही आज राजस्थान में भी देखा जा सकता है क्योंकि वहां के सीएम बोल रहे हैं कि ये कोई बड़ी घटना नही है और बस ये बोलकर लगे विपक्ष पर बरसने जबकि उन्हें इस मुद्दे पर सियासत ना करके दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करके राजधर्म का पालन करना चाहिये।

पूरी योजना बनाकर आए थेउपद्रवी

इस घटना के चश्मदीदों का कहना है कि उपद्रवी पूरी योजना बनाकर आए थे। उन्होंने जमकर उत्पात मचाया। तेजाब से भरी बोतल घरों पर फेंकी, दहशत फैलाने के लिए तलवार लहराई। 14 से ज्यादा मोहल्ले के लोगों ने अपने इलाके में बवाल की बात कही है। कुछ जगह नकाबपोश युवकों ने हमला बोला और पत्थरबाजी की। महिलाओं ने बताया कि उनके साथ छेड़खानी की गई। बाद में स्थानीय लोग भी डंडे लेकर निकले। कबूतर चौक पर पांच साल की बच्ची के साथ मारपीट की खबर है। एक चश्मदीद ने कहा कि कुछ लोग पाइप, लोहे के सरिये, लाठी-डंडे लेकर आए थे। एक महिला ने बताया कि ये नए लड़के थे, 15-20 के साल के। वहीं जालप मोहल्ला में विधायक के घर के बाहर दो बाइक को आग के हवाल कर दिया गया था और ऐसे तस्वीरों और पुलिस को मिले वीडियो में भी साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि इसके बाद भी सीएम साहब इसे छोटी घटना बोल कर कहीं ना कहीं मामले को दबाने में लगे हुए है जबकि आगे से ऐसी घटना राज्य में ना हो इसके लिये सत्ता पक्ष और प्रसाशन को बिना किसी के दबाव में आये काम करना चाहिये और सियासत बंद करनी चाहिये।

Jodhpur: उपद्रवियों ने घरों पर फेंकी तेजाब की बोतलें, युवक को मारे चाकू,  तलवारें लहराकर उत्पात मचाया - TIS Media

आरोप लगाकर बचने की जगह उठाना होगा सख्त कदम

जिस तरह से बीते कुछ समय से देश के कई राज्यों में दंगों की लपटें देखी जा रही है उससे तो यही लगता है कि राज्यों को सियासी रंग में ना रंगकर इस दंगों में शामिल शरारती तत्वों पर ठोस कार्यवाही करनी चाहिये क्योंकि जिस तरह से लगातार कई राज्यों से दंगे की खबर सामने आई हैं वो देश के विकास में बाधा बन सकती है और कुछ देश विरोधी ताकत इसका गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष विपक्ष पर आरोप लगाकर नहीं बच सकती है। अगर विपक्ष पर आरोप सही है तो उसे सबूत सहित पेश करना चाहिये जिससे दोषियों को सजा मिल सके। जबकि इसके विपरीत राजस्थान में देखा गया कि पुलिस दंगों में शामिल लोगों की जगह कुछ अज्ञात लोगों के नाम शिकायत दर्ज करके सिर्फ खाना पूर्ति कर रही है जो गलत है।

कहते हैं कि दंगे की आग जब लगती है तो वो ये नही देखती कि ये घर आपके किसी दोस्त या आपके पड़ोसी का है। इसलिये एक तरफ तो देशवासियों को अफवाह में आकर इन लोगों के साथ कभी नहीं खड़े होना चाहिये दूसरा सरकारों को ये करना चाहिये वो बिना सियासत किये अपराधियों पर सख्त कदम उठाये फिर वो किसी भी धर्म या जाती का क्यों ना हो।

 

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