तथाकथित किसानो का रेल रोको अभियान  नही देश के विकास पर ब्रेक लगाने का अभियान

पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट की फटकार खाने के बाद भी किसानों के नाम को बदनाम करने में जुटे कुछ लोगों ने एक बार फिर से ट्रेन रोको आंदोलन आज किया। हालांकि इसका असर पंजाब और हरियाणा को छोड़ देश में ज्यादा नहीं दिखा। लेकिन कही ना कही ये तथाकथित किसान देश पर ब्रेक लगाते हुए जरूर दिखे।

देश के विकास पर ब्रेक लगाते कुछ लोग

कृषि कानून को लेकर हठधर्मिता में उतरे कुछ तथाकथित किसान का काम ही अब देश के विकास को कैसे रोका जाये बस इसके लिये ही कुछ ना कुछ करते रहना है। इसी क्रम में कभी भारत बंद का ऐलान करना तो कभी ट्रेन रोको अभियान को अंजाम देना है। इससे आम लोगों को कितनी भी परेशानी हो लेकिन ये लोग सिर्फ अपने मतलब के लिये ऐसा करते चले आ रहे है। इसी क्रम में ट्रेन रोक कर आज एक बार फिर देश की स्पीड को कम करने का काम इन लोगों ने किया। हालांकि इसका असर पंजाब हरियाणा को छोड़ कही ज्यादा नहीं दिखा, लेकिन हां इससे कई ट्रेने रद्द करनी पड़ी जिससे लोग जरूर परेशान हुए।

अब सरकार को लेना होगा सख्त कदम

जिस तरह से किसान आंदोलन में लगातार अराजकता बढ़ती जा रही है उसके बाद अब सरकार को सख्त कर्यवाही करनी चाहिये, कोर्ट भी ऐसा करने के लिये कहती हुई नजर आ रही है। पिछले 10 महीने से लगातार हाइवे में बैठे इन तथाकथित किसानों के चलते करोड़ो रूपये का नुकसान हो चुका है। इसके साथ ही साथ कभी भारत बंद तो कभी रेल रोको अभियान शुरू करके ये देश का माहौल खराब करते है। लालकिले पर इनका हंगामा या फिर कई दूसरे जिलो में पुलिस पर बल का प्रयोग करते इनकी अराजकता वादी सोच की पोल भी खुल गई है। ऐसे में अब सरकार को इनके खिलाफ किसान समझकर नरमी बरतना नहीं चाहिये। क्योकि वो कहावत इनपर बिलकुल फिट बैठती है कि लातो के भूत बातो से नहीं मानते।