कश्मीर मुद्दे पर बोल खुद ही फंसे ट्रम्प, अमेरिका ने मांगी माफ़ी

कश्मीर समस्या के ऊपर अपने विवादस्पद बयान के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद ही फंस गए हैं| यहाँ तक की अपने देश में ही वो सवालों के घेरे में घिर चुके हैं| इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले में स्पष्टीकरण दिया है और कहा है कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है|

Trump Speaking on the Kashmir issue

जब फिसली ट्रम्प की जबान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ लंच कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रम्प की जबान फिसली| उन्होंने कहा कि, “नरेन्द्र मोदी ने ओसाका में G-20 समिट के दौरान मुझसे कश्मीर मसले को सुलझाने में मध्यस्थ बनने की पेशकश की थी”|

अपने ही देश में ट्रम्प की आलोचना

अपने इस बयान के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प को अपने ही देश में आलोचना झेलनी पड़ रही है| अमेरिकी कांग्रेसमैन ब्रैड शेरमैन ने ट्रंप के बयान की कड़ी निंदा की है| शेरमैन ने कहा कि ट्रम्प का ये बयान भ्रामक है, दक्षिण एशिया की थोड़ी बहुत भी जानकारी रखने वाला व्यक्ति ये बात जानता है कि भारत कभी भी कश्मीर मसले पर किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का पक्षधर नहीं रहा है|

यहाँ तक कि प्रेस कांफ्रेंस के तुरत बाद व्हाइट हाउस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति तक में कश्मीर का कोई जिक्र नहीं था|

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी किया ट्रम्प के बयान का खंडन

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी ट्रम्प के दावे का खंडन किया है| ट्विटर पर जारी अपने बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविश कुमार ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कभी किसी तरह का आग्रह नहीं किया। यह भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ सारे मसलों पर सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत की जा सकती है। साथ ही किसी भी तरह के संवाद के लिए पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद पर लगाम लगानी होगी|

कश्मीर पर ट्रम्प का बयान कोई पहला उदाहरण नहीं है जब उनकी जुबान फिसली हो| अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, 7 जून, 2019 तक ट्रंप ने बतौर राष्ट्रपति 869 दिन पूरे किए हैं और इस दौरान उन्होंने 10,796 झूठे या भ्रामक दावे किए हैं।