सुपर सोनिक क्रूस मिसाइल ब्रह्मोस खरीदने को दुनिया बेकरार

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रूस और भारत के सहयोग से निर्मित दुनिया की सबसे तेज सुपर सोनिक क्रूस मिसाइल ब्रह्मोस को खरीदने की चाहत रखने वाले देशों की एक तरह से लाइन लग गई है। हालांकि इस बात की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन अनुमान है कि किस देश को पहली बार ये मिसाइल बेचा जायेगा, इसकी घोषणा अगले साल तक हो।

थाईलैंड, फिलीपींस, इंडोनेशिया समेत दर्जन भर देशों ने दिखाई खरीद की रुचि

नई दिल्ली स्थित रुसी दूतावास के उप प्रमुख रोमन बाहुशकिन के अनुसार, “ब्रह्मोस मिसाइस सिस्टम को लेकर दुनिया के तमाम देशों अत्यधिक उत्सुकता है। फिलीपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया समेत तकरीबन एक दर्जन देश इसे खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। लेकिन अभी तक किसी भी देश के साथ बातचीत को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जो भी फैसला होगा वह राजनीतिक, आर्थिक व तकनीकी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।“

बाहुशकिन के अनुसार, “ब्रह्मोस ने भारत और रूस के रणनीतिक रिश्तों को जो गहराई दी है, उसे अगले वर्ष और पुख्ता किया जाएगा। दोनों देश मिलकर ब्रह्मोस जैसे दूसर युद्ध प्रणाली भी विकसित कर रहे हैं। दोनो देशों के बीच मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत कई रक्षा उपकरणों को विकसित करने पर बात हो रही है। रूस चाहता है कि भारत के साथ विकसित होने वाले रक्षा उपकरणों की मार्केटिंग तीसरे देशों में भी की जाए।“

बता दें कि सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस रूस व भारत ने मिल कर तैयार किया है| भारत व रूस अगर ब्रह्मोस को किसी तीसरे देश को बेचने में सफल हो जाते हैं तो देश की तरफ तरफ से हथियारों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बड़ी धमक होगी। उल्लेखनीय है कि अभी तक जितने देशों ने ब्रह्मोस को खरीदने में रूचि दिखाई है, उसमें से ज्यादातर दक्षिण एशियाई देश हैं।

वर्ष 2020 भारत और रूस के रणनीतिक रिश्तों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है, जब दोनो देशों की तरफ से रक्षा सहयोग से जुड़ी कुछ बड़ी परियोजनाओं का ऐलान किया जाएगा। ऐसे में दोनो देश ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए किसी खरीदार देश का चयन कर वैश्विक स्तर पर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया योजना ने भारत को सामरिक दृष्टि से विकसित देशों की पंक्ति में ला खड़ा लिया है| कुछ सालों पहले तक जहाँ भारत अपनी छोटी-छोटी सैन्य जरूरतों के लिए पश्चिमी देशों पर आश्रित रहता था, वहीँ आज देश रक्षा उपकरणों का निर्यात करने लगा है| ये बदलते भारत की पहचान है|


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