किसी ने तोड़ा नियम, तो किसी ने देश को दी रफ्तार

पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से देश में चल रहे लॉकडाउन में अब ढील दे दी गई है। लेकिन इसके बावजूद भी हमे ये जरूर ध्यान रखना चाहिये कि कोरोना संकट अभी देश से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कोरोना से बचने के लिए सरकार की गाइडलाइन को ध्यान में रखकर कदम उठाना चाहिये। लेकिन पहले ही दिन कुछ जगह से भय खाने वाली तस्वीर आई तो कुछ जगहों से बेहतर तस्वीर भी आई ।

सोशल डिस्टेंसिंग भूले लोग

लॉकडाउन में मिली राहत के पहले दिन ही देश के ज्यादातर राज्य से जो तस्वीर आई है उसको देखकर ये कहने में कोई हिचक नही है, कि देश में पहले दिन ही सोशल डिस्टेंसिंग को लोगो ने खूब ताक पर रखा खासकर शराब के ठेके में जिस तरह से सुबह से ही लोगों की लंबी लाइन देखी गई उससे तो यही लग रहा था कि लोग बिना शराब पिये ही नशे में हैं तभी कोरोना से बिना भय खाये वो नियमों को ताक पे रखकर निकल पड़े हैं। लेकिन ये गलती कितनी भारी पड़ सकती है आप खुद समझ सकते हैं क्योकि देश ने जिस तरह लॉकडाउन से कोरोना को थाम रखा था वो एकाएक बहुत बड़ी तादाद में फैल सकता है। ऐसे में ये डराने वाली तस्वीर आगे न दिखे इसके लिए देश की जनता को खुद ही संकल्प लेना होगा।

आर्थिक रथ का पहिया दौड़ा

लॉकडाउन में मिली ढ़ील से सबसे बड़ा फायदा ये हुआ है कि देश में एक बार फिर से कल कारखानों से मशीन चलने की आवाज आने लगी है। जिससे ये साफ महसूस होने लगा है कि देश की इकोनॉमी ने रफ्तार पकड़ ली है। कयास लगाया जा रहा है कि जिस तरह की छूट मिली है उससे देश की 80 फीसदी इकोनॉमी का काम शुरू हो गया है। खासकर प्रोडक्शन देश में शुरू होने से लोगों को फिर से रोजगार मिलने लगेगा, तो दूसरी तरफ प्रवासी मजदूर भी राज्यों को छोड़कर घर के लिए नही निकलेंगे। खुद इसका जीता जागता उदाहरण देखने को भी मिल रहा है। ईट के भट्टे में काम करने वाले अब ये कहने लगे हैं कि वो घर नही जायेंगे क्योंकि उनका काम अब शुरू हो गया है। ऐसे कई सेक्टर में भी देखा जा रहा है। वही दूसरी तरफ कारखानों में माहौल भी कुछ दूसरे किस्म का देखा गया है। जहां कारखानों में सोशल डिस्टेंसिंग देखी जा रही है। जिससे ये पता चलता है कि कोरोना को हराने के लिये हम पूरी तरह से तैयार हैं।

बहरहाल देश में आज दो तरह की तस्वीर देखने को मिल रही थी, एक वो जो अपना कल संवारने के लिये कारखानों की तरफ जा रहे थे, तो दूसरी तरफ कुछ उन लोगों की जो ठेके की तरफ जा रहे थे। लेकिन ऐसे में अब हमे ही फैसला करना होगा कि हम किस रास्ते पर जायें जिससे देश और अपना भला कर पायें और हां इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर नियम तोड़ते हैं तो कोरोना का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है और वो अपनी गिरफ्त में लेने के लिये बाहर खड़ा है बस हमे इससे बचने के लिये सजग रहना होगा।