किसी ने रेगिस्तान में खड़ा किया जंगल, तो किसी ने लवारिस शवों का किया आंतिम संस्कार, पद्म श्री पाने वाले इन गुमनाम सितारों के कुछ ऐसा है काम

अब वो दौर चला गया जब अवॉर्ड सिर्फ जान-पहचान या फिर सिफारिश के चलते मिल जाये। अब अवॉर्ड उन्ही की झोली में जाता है जिसने देश के लिये कुछ किया हो ऐसे ही कुछ लोगों को भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। आइये जानते है उनके बारे में जो हकीकत में पर्दे के पीछे रहकर बहुत बड़े बड़े काम कर रहे है।

रेगिस्तान में पेड़ लगाने वाले हिम्मत राम भंभू को पद्म श्री

राजस्थान के नागौर जिले के हिम्मत राम भंभू को उनके कार्यों के लिए पद्म श्री सम्मान मिला है। नागौर के पास एक गांव में उन्होंने 25 बीघा जमीन पर न सिर्फ 11,000 पेड़ों वाला जंगल खड़ा किया है, बल्कि पांच साल में पांच लाख से ज्यादा पेड़ लगाए हैं जो अपने आपमें एक ऐसा कार्य है जिससे आने वाला वक्त कभी नहीं भूलेगा।

jagran

सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद शरीफ को मिला पद्म श्री

सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद शरीफ को सोमवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। साइकिल मैकेनिक से सामाजिक कार्यकर्ता बने शरीफ, लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। बुजुर्ग समाजसेवी मोहम्मद शरीफ को लावारिस लाशों के मसीहा के तौर पर जाना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने पिछले 25 वर्षों में 25,000 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है। 30 वर्ष पूर्व युवा पुत्र की मार्ग दुर्घटना से मौत और लावारिस के तौर पर उसके अंतिम संस्कार ने शरीफ पर ऐसा असर डाला कि वो किसी भी लावारिस शव के वारिस बन कर सामने आए।

jagran

फल बेचने वाले हरेकला हजब्बा को पद्म श्री

कर्नाटक के मंगलुरु के संतरा बेचने वाले हरेकला हजब्बा को सोमवार को भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया। 66 वर्षीय हजब्बा ने पैसे जमा कर गांव में एक स्कूल का निर्माण कर ग्रामीण शिक्षा में क्रांति लाने के का काम किया है। आज वो अपने गांव में एक विश्वविधालय खुलवाने के लिए पूरी लगन से लगे हुए है जिससे आसपास के इलाको में रहने वालो को शिक्षा के लिये दूर ना जाना पड़े ।

jagran

सीड मदर’ रहीबाई को पद्म श्री

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की आदिवासी किसान राहीबाई सोमा पोपरे को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से कृषि के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। राहीबाई को ‘सीड मदर’ के रूप में भी जाना जाता है। इलाके में जैविक खेती के लिये आदिवासियों में जिस तरह से इन्होने जोश भरा है वो सचमुच तारीफ के काबिल है।

jagran

इनसाइक्लोपीडिया आफ फारेस्टतुलसी गौड़ा को पद्म श्री

पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा को सोमवार को साल 2020 के लिए भारत के राष्ट्रपति से पद्म श्री पुरस्कार मिला। कर्नाटक के होनाली गांव के रहने वाले गौड़ा ने 30,000 से अधिक पौधे लगाए हैं और उन्हें पौधों और जड़ी-बूटियों की विविध प्रजातियों का ज्ञान है।

jagran

अब्दुल जब्बार को पद्म श्री

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए 35 साल तक संघर्ष करने वाले अब्दुल जब्बार को सोमवार को मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जी हां, 35 साल तक न्याय दिलाने की उम्मीद उन्होने नहीं छोड़ी थी आखिर कहते है ना कि पूरी लगन से अगर कोई काम किया जाता है तो वो जरूर पूरा होता है और इश बात को सच अब्दुल जब्बार ने की है।

एलिफैंट डाक्टरको पद्म श्री

एलिफैंट मैन आफ इंडिया और एलिफैंट डाक्टर के नाम से पहचाने जाने वाले डा. कुशाल कोंवर सरमा को उनके कार्यों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। एक पशुचिकित्सा और असम में पशु चिकित्सा विज्ञान कालेज में सर्जरी और रेडियोलाजी के प्रोफेसर बीते एक दशक में उन्होंने जंगलों में घूमकर 600 से अधिक हाथियों का इलाज किया है।jagran

ये वो लोग है जिन्हे ना मीडिया में आने में दिखने का शौक है ना ही अपने नाम की वाहवाही होने का घमंड। ये वो भारत के लाल है जिन्हे सिर्फ भारत माता को आगे ले जाने की ललक है और वो ऐसा करते भी जा रहे है। ऐसे लोगों को देश की तरफ से सलाम।