सरदार पटेल से जुड़े कुछ किस्से जो उन्हे बनाती है ‘लौह पुरूष’

भारत के एक ऐसे लाल की आज जन्म जंयती है जिसके योगदान को देश कभी नकार नही सकता है, जिन्हे भारत के लौह पुरुष के तौर पर भी जाना जाता है। अब आप समझ गये होगे कि अब इस जननायक की बात कर रहे है। जी हां, हम बात कर रहे है देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जिन्हे स्वतंत्रता संग्राम से लेकर मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में दिये योगदान के लिए कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव प्रेरणा के रूप में देश के सामने रहेगा।

टेलीग्राम में लिखी थी पत्नी के निधन की बात

गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म कौशल को योग रूप में समझाया है अर्थात अपनी पूरी कुशलता, क्षमता के साथ दायित्व का निर्वाह करना चाहिए। सरदार पटेल ने आजीवन इसी आदर्श पर अमल किया। जब वह वकील के दायित्व का निर्वाह कर रहे थे, तब उसमें भी मिसाल कायम की, जब वह जज के सामने जिरह कर रहे थे, तभी उन्हें एक टेलीग्राम मिला, जिसे उन्होंने देखा और जेब में रख लिया। उन्होंने पहले अपने वकील धर्म का पालन किया, उसके बाद घर जाने का फैसला लिया। तार में उनकी पत्नी के निधन की सूचना थी जो उनके लौहपुरुष होने का भी उदाहरण देती है। ऐसा नहीं कि इसका परिचय आजादी के बाद उनके कार्यों से मिला, बल्कि यह उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी।

फोड़े को गर्म सलाख से किया ठीक

ये किस्सा सरदार साहब के बचपन से जुडा हुआ है। जब वो मात्र 16 साल के थे उस वक्त उन्हें पैर में एक फोड़ा हो गया जिसका खूब इलाज करवाया गया लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। इस पर एक वैद्य ने सलाह दी कि इस फोड़े को गर्म सलाख से फोड़ा जाए तो ठीक हो जाएगा। बच्चे को सलाख से दागने की हिम्मत किसी की भी नहीं हुई ऐसे में सरदार पटेल ने खुद ही लोहे की सलाख को गर्म किया और उसे फोड़े पर लगा दिया, जिससे वह फूट गया। उनके इस साहस को देख परिवार भी अचंभित रह गया। यह प्रसंग उनके जीवन को समझने में सहायक है। आगे चलकर उनकी इसी दृढ़ता और साहस ने उन्हें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुशल प्रशासक के रूप में प्रतिष्ठित किया।

 

गांधी भी मानते थे लौह पुरुष का लोहा

महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के साथ ही कांग्रेस में एक बड़ा बदलाव आया था। इसकी गतिविधियों का विस्तार सुदूर गांव तक हुआ था लेकिन इस विचार को व्यापकता के साथ आगे बढ़ाने का श्रेय सरदार पटेल को दिया जा सकता है उन्हें भारतीय सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की भी गहरी समझ थी। वह जानते थे कि गांवों को शामिल किए बिना स्वतंत्रता संग्राम को पर्याप्त मजबूती नहीं दी जा सकती। वारदोली सत्याग्रह के माध्यम से उन्होंने पूरे देश को इसी बात का संदेश दिया था। इसके बाद भारत के गांवों में भी अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद होने लगी थी। देश में हुए इस जन-जागरण में सरदार पटेल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। इस बात को महात्मा गांधी भी स्वीकार करते थे। सरदार पटेल के विचारों का बहुत सम्मान किया जाता था।

देश को एकता के धागे में पिरोया

गृहमंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देशी रियासतों  को भारत में मिलाना था। इस काम को उन्होंने बिना खून बहाए करके दिखाया। केवल हैदराबाद के ‘ऑपरेशन पोलो’ के लिए उन्हें सेना भेजनी पड़ी। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिए उन्हे भारत का ‘लौहपुरुष’ के रूप में जाना जाता है। सरदार पटेल की महानतम देन थी 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण करके भारतीय एकता का निर्माण करना। विश्व के इतिहास में एक भी व्यक्ति ऐसा न हुआ जिसने इतनी बड़ी संख्या में राज्यों का एकीकरण करने का साहस किया हो।

निधन के बाद बैंक खाते में निकले मात्र 260 रूपये

कठोर निर्णय लेने के लिये जाने जाने वाले सरदार साहब का जीवन कितना सादगी से भरा हुआ था इस पर चर्चा करने की कोई बहुत जरूरत नही है क्योकि सब जानते है कि सरदार साहब देश के इतने बड़े पद पर रहने के बाद भी बड़ी सादगी से अपना जीवन जीते चले आये थे। यहां तक सरदार साहब के पास अपना खुद का मकान या वाहन नही था वो मुबंई में एक किराये के घर में रहते थे और जिस वक्त उनका निधन हुआ था उस वक्त उनके खाते में महज 260 रूपये ही निकले थे जो ये दर्शाती है कि उनका सिर्फ एक मक्सद रहा था वो भारत को शिखर पर ले जाने का और कुछ नही।

हमेशा देश के लिये जीने वाले सरदार पटेल को आज देश नमन कर रहा है लेकिन देश ने वो दौर भी देखा है जब उनके कामों पर कुछ लोग पर्दा डालते आये थे लेकिन आज उन्हे वो मुकाम मिल गया है जिसके वो हकदार थे।