कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना…

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इतिहास गवाह है कि भारत जंग में दुश्मनों के दाँत हमेशा खट्टा करता रहा है लेकिन दिल के फफोले जल उठे सीने के दाग से इस घर को आग लग गयी घर के चिराग से, अपने लोग सेना पर सवाल करते हैं फौज का मनोबल तोड़ते हैं जनता को गुमराह करते हैं। जिससे दुश्मन के सामने भारत मनोबल में पराजित होता है। कुछ ऐसा ही अब हो रहा है जब भारत कोरोना, चीन, पाकिस्तान और तो और नेपाल से अकेले लोहा ले रहा है। तो कुछ लोग देश की सेना के पराक्रम पर सवाल पूछ रहे हैं और फेक न्यूज का एजेंडा चला रहे हैं। मजे की बात ये है कि ये वही लोग हैं जिनके पुरखे आजादी के वक्त सत्ता हासिल करने के लिए ऐसा काम करते आये हैं।

क्या सेना से सवाल बनता है?

जब एक तरफ चीन सीमा पर विवाद खड़ा कर रहा है तो पाकिस्तान आतंकियों को देश में भेजने के लिये सीमापार से गोलीबारी कर रही है। ऐसे में फौज दोनो मोर्चे पर सीना तानकर दुश्मन से मोर्चा ले रही है। जिससे दुश्मन के पसीने छूट रहे हैं। लेकिन कुछ हमारे देश के लोग इस कठोर वक्त में सेना का मनोबल बढ़ाने के बजाये उनसे सवाल पूछने में लगे हुए हैं कि आखिर सीमा पर इस तरह का हाल क्यों हो गया है क्या इस समय ये सवाल ठीक लगते हैं आपको क्योंकि जब सेना के साथ मिलकर खड़े होने का वक्त है तब सवाल पूछकर हम अपनी सेना को कम नही तौल रहे हैं? इतना ही नही कुछ तो ऐसे लोग भी है जो दुश्मन देश को सही बताते आये हैं। साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक को लेकर फौज का मजाक भी उड़ाते रहे हैं। लेकिन चीन पर ये लोग कुछ नही बोलते। चीन ने जिस तरह से 1962 में 40 हजार वर्ग फुट भारत की जमीन छीन ली इसपर सवाल नही करते बल्कि चीन हो या पाकिस्तान दोनो को करारा जवाब देने वालों को सवालों के कटघरे में खड़ा करके के देश में दुश्मन को सहायता करते हुए दिख रहे हैं। वो भी महज सियासत के लिए लेकिन देश की जनता अब समझ चुकी है कि देश के लिए कौन क्या कर रहा है।

सत्ता से दूरी की तिलमिलाहट

जो लोग आज इस कठिन दौर पर अफवाहें फैलाकर देश में माहौल खराब करना चाहते हैं और जो लोग इनके साथ देने का काम कर रहे हैं वो बस इसलिये क्योंकि सत्ता की मलाई खाने को उन्हे नही मिल पा रही है। जिसकी वजह से वो तिलमिला रहे हैं। आलम ये है कि सही को गलत और गलत को सही साबित करने में लगे हैं। फिर वो कोरोना को लेकर लॉकडाउन लगाने पर हो या फिर महापैकेज के ऐलान पर हो इन लोगों को तो बस देश में संदेह पैदा करके माहौल को खराब करना है जैसे साल की शुरूआत में CAA को लेकर देखा गया था। ये लोग चाहते यही हैं कि देश में कुछ परिवर्तन न हो क्योंकि ऐसा हो गया तो सत्ता की मलाई उनके हाथ से और दूर हो जायेगी।

बहरहाल ऐसे लोग कितना भी गला फाड़ ले लेकिन देश की जनता अब समझ चुकी है कि देश को आत्मनिर्भर कौन बना सकता है और कौन नही इसीलिये तो इन लोगों की दाल देश में गल नही पा रही है। तभी ये सवाल करके अफवाह फैलाने का जतन कर रहे हैं। लेकिन ये आत्मनिर्भर होता हुआ भारत है जो ऐसे लोगो को करारा जवाब देता जा रहा है वो भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था के साथ।


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