स्पीड ब्रेक के रोल में कुछ लोग, देश के विकास पर लगाना चाहते है ब्रेक

देश में कुछ लोगों का बस एक ही काम बन गया है कि अगर विकास के लिए कोई काम चल रहा हो तो उसे रोको फिर वो राफेल हो या दूसरे रक्षा सौदे या भी अब  सेंट्रल विस्टा परियोजना। कुछ लोग बस इसे रोक कर ही जश्न बनाने की सोच रहे है और आरोप लगा रहे है कि देश में कोरोना से हालात खराब है और सरकार कई परियोजना को चालू रख कर कही न कही पैसा बर्बाद कर रही है। जबकि उन्हे ये नही मालूम कि सरकारे इसके लिये अलग अलग मद से पैसा खर्च करती है। इतना ही नही इनके खुद के साथ ऐसा कर रहे है तो इन्हे दिख भी नहीं रहा है।

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सेंट्रल विस्टा परियोजना पर गुमराहा करने वालो को सरकार का जवाब

सेंट्रल विस्टा परियोजना पर फिजूल खर्ची का आरोप लगाने वालो को सरकार ने ऑकड़ो के साथ जवाब दिया है जिसके बाद देश की जनता के बीच में उनकी हकीकत खुलकर सामने आ गई है कि वो बस देश के विकास पर ब्रेक लगाना चाहते है। तभी तो सरकार के इस काम को रोकवाने के लिये कोर्ट तक चले गये हालाकि कोर्ट ने उनकी दलील तक को खारिज कर दी। लेकिन वो इतने दूध के धुले है ये बात केंद्र सरकार ने ऑकड़ो से समझाया केंद्र की माने तो ये पूरी परियोजना का खर्च 862 करोड़ है जबकि महाराष्ट्र सरकार जो विधायको के लिये नये आवास बनवा रही है। उसका कुल खर्च 900 करोड़ है उसे रोकने के लिये कोई नहीं बोलता इसी तरह केजरीवाल साहब का 3 महीने का विज्ञापन खर्च महज 150 करोड़ है लेकिन इसपर सब चुप है केवल दिक्कत है तो सेंट्रल विस्टा से क्योकि वो मोदी सरकार बनावा रही है। उसे रोको बस इस लिये क्योकिएक तो देश में तेजी से विकास हो रहा है तो दूसरी तरफ इन लोगो का कमीशन मर रहा है क्योकि मोदी सरकार में अब घोटालेबाजी नहीं होती तभी तो इन लोगो के पेट में दर्द हो रहा है।

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सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत होने वाला निर्माण

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत एक नए संसद भवन और नए आवासीय परिसर का निर्माण किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति के आवास के साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालय के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाना है। सेंट्रल विस्टा परियोजना की सितंबर 2019 में घोषणा की गई थी। 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना की आधारशिला रखी थी। इस पुनर्विकास परियोजना में एक नए संसद भवन का निर्माण प्रस्तावित है। एक केंद्रीय सचिवालय का भी निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक तीन किलोमीटर लंबे ‘राजपथ’ में भी परिवर्तन प्रस्तावित है। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को संग्रहालय में बदल दिया जाएगा और इनके स्थान पर नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में स्थित ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र’ को भी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। इस क्षेत्र में विभिन्न मंत्रालयों व उनके विभागों के लिए कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा।

जिस तरह से कुछ लोग इस मुद्दे का बेवजह तूल दे रहे है उससे यही पता चलता है कि जैसे उनके घर में अगर कुछ आपदा आ जाती है तो वो खाना खाना बंद कर देते है, दोस्तो ऐसा नहीं उन्हे तो बस सरकार को बदनाम करने के लिये कुछ न कुछ करना है लेकिन जनता अच्छी तरह से जानती है कि वो आपदा के वक्त भी सियासत कर रहे है।