सही को गलत और गलत को सही साबित करने में लगे कुछ लोग

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CAA को लेकर सही को गलत और गलत को सही साबित करने की जो कवायत देखी जा रही है उससे देश का माहौल जरूर गरमा गया है आलम ये है कि देश के अधिकतर राज्यों में हिंसा का दौर देखा जा रहा है। लेकिन ऐसा हुआ क्या कि देश में CAA कानून को लेकर भ्रम फैलाने वाले हिंसा करवाने में सफल हो गये। आखिर पर्दे के पीछे ये किसका काम था जिसने देश को कुछ दिन के लिये आग में झोक दिया। अमन और विकास की राह में चल रहा देश एकाएक क्यो हिंसा का शिकार हो गया? ये सवाल तो बनता है

मोदी सरकार पर हल्ला बोलने के लिये नही था कोई मुद्दा?

जिस तरह से मोदी 2.0 सरकार काम कर रही थी उसको देखते हुए यही कहा जा सकता है, कि देश हित के लिए मोदी सरकार टॉप गियर में काम कर रही थी। मसल लोकसभा में तीन तलाक हो, धारा 370 हो या फिर दूसरे मसले एक के बाद एक हल हो रहे थे और जनता के सामने सरकार की छवि तेजी से काम करने वाली बन रही थी ऐसे में विपक्ष के पास सरकार को बदनाम करने के लिये कोई मुद्दा नही मिल पा रहा था। शायद इसीलिये जब CAA बिल पास हुआ वैसे ही विपक्ष के काफी सारे नेताओं के बयान देश को भड़काने वाले आने लगे थे, अब आप देख लीजिये NRC पर सरकार ने कोई फैसला भी नही लिया, उसके बाद भी NRC पर खूब अफवाह देखी गई। या विपक्ष को हम देश हिंसा भड़काने का जिम्मेदार नही मान रहे है, लेकिन जब देश में माहौल तनावपूर्ण हो तो फिर विपक्ष का भी काम बनता है कि वो देश में अमन शांति के लिये आगे आये,जैसा कई बार इतिहास में पीछे देखा गया है जब खुद विपक्ष ने सड़को पर हिंसात्मक विरोध करने वालों को रोका, लेकिन इस बार ऐसी भुमिका विपक्ष की नही देखी गई, जैसी मंडल आंदोलन के वक्त देखने को मिल रही थी। बल्कि शर्म तो तब आती है जब दंगा कर रहे उपद्रवियों को रोकने के लिये पुलिस कार्यवाही को ही गलत बताया जा रहा है और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है।

सरकारी तंत्र का फेल होना?

देश में जिस तरह से हिंसा फैली उसमे कही न कही लोकल सरकारी तंत्र की भी जवाब देही बनती है, ऐसे में ये कह देना कि इस तरह की घटना का कोई अंदाजा नही था, बेइमानी ही होगा। हां, ये जरूर है कि कुछ दिन पहले ही जिस तरह से अयोध्या मुद्दे, या धारा 370 हटने के बाद देश का माहौल रहा उससे  लोकल प्रशासन अति आत्मविश्वास में था कि देश अब छोटी छोटी बातों पर नही लड़ सकता है। लेकिन इसी का फायदा उन लोगो ने उठा लिया जो जिस घर में रहते है उसी में आग लगाते है। पर ये एक सबक है और इसे आने वाले दिनों में याद रखना चाहिये|

बरहाल जहां जहां हिंसा के मामले सामने आये है, उन जगहों पर जांच चल रही है, और हिंसा फैलाने वाले देर सबेर सबके सामने जरूर आयेंगे। लेकिन ये जरूर है कि इस हिंसा से विपक्ष ये सोच रही है कि उसे सत्ता पक्ष से भिड़ने के लिये आचूक हथियार मिल गया है, लेकिन ये भी सच है कि जिस तरह से जनता अब सोशल मीडिया अखबार और सरकार के जरिये इस कानून के बारे में जान रही है। उससे विपक्ष का असल चेहरा भी सामने आ रहा है। फिलहाल देखना ये होगा कि ये सच आने वाले दिनों में विपक्ष को कितना भारी पड़ेगा। क्योकि ये बात सच है कि झूठ की उम्र ज्यादा नही होती।


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