मोदी विरोध में राष्ट्रविरोध का सुर गाते कुछ बुद्धिजीवी

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देश में इस वक्त सियासत का ये आलम हो गया है, कि सरकार का विरोध करते करते कुछ लोग भारत के इतिहास के साथ भी छेड़छाड़ करने लगे है, और तो और अभी तक धर्म के नाम पर सियासत करने वाले हलवा का धर्म भी बताने लगे है, ये सुनकर आपको भी हंसी आ रही होगी। लेकिन देश इस वक्त जिस द्वन्द से गुजर रहा है उससे निकालने का काम अब देशवासियों को ही करना होगा।

आपने अक्सर सुना होगा कि जब किसी देश के टुकड़े-टुकड़े होते हैं, तो वो छोटे-छोटे देशों या फिर रियासतों में बदल जाता है, आजादी के पहले भारत का भी यही हाल था। यहां पर भी कई रियासते थे, लेकिन आजादी के बाद एक राष्ट्र भारत मानचित्र पर उतरा। जिसकी खासियत यहां की एकता थी। जिसे देश के दुश्मन भी नहीं तोड़ पाये उसे आज घर के कुछ लोगो से खतरा होता हुआ दिख रहा है। क्योकि ये लोग सिर्फ सियासत के चलते ऐसी गंदी चाल चल रहे है जिसका हर्जाना आने वाले दिनो में हमारी आने वाली पीड़ी को झेलना पड़ सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण CAA के विरोध में दिख रहा है। जिसमें कुछ लोग ऐसा भ्रम फैला रहे है जिससे देश का माहौल खराब हो रहा है।

चुनाव में हारने की टीस तो नहीं

जिस तरह से देश में सरकार के फैसलों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे है। उसके पीछे कुछ लोगों की चुनाव में हारने की टीस लग रही है। और उनका साथ वो लोग दे रहे है जो कभी एक परिवार की गुलामी में लगे रहते थे और उसका फायदा उठा रहे थे। ऐसे ही एक सज्जन ने भारत के गौरवशाली इतिहास पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि देश का असल इतिहास अंग्रेजो के वक्त ही गणा गया है। इससे पहले इतिहास सिर्फ कुछ कोरी कहानियों में ही बताया गया है जिसका कोई साबूत नहीं है। तो एक महाशय तो इससे भी दो कदम आगे निकल गये और उन्होने हलवा का धर्म भी बता दिया, इतना ही नही उन्होने कहा कि भारत में जो कुछ भी निर्माण कार्य हुआ है, वो एक धर्म विशेष ने करवाया है। ऐसे वजनो को सुन कर तो यही लगता है कि मोदी सरकार के विरोध में कोई ठोस मुद्दा नही मिलने के चलते ही उनके खिलाफ देश में माहौल खराब करके बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। जो काफी भायावर है। जो एक तरह की चुनावी हार की टीस ही है।

बहरहाल देश के बुद्धिजीवी और मोदी विरोधियों की इस सोच के चलते ही आज देश का नाम विश्व में खराब हो रहा है। जिसके चलते आने वाले दिनो में कुछ परिणाम गलत भी हो सकते है।लेकिन मोदी सरकार की कूटनीति का असर है, कि विदेश में भारत की साख खराब नही हो रही है। लेकिन ये जरूर है कि इस वक्त देश राष्ट्रवाद और राष्ट्रविरोधियों के द्वन्द में फंसा हुआ है, ऐसे में देश की जनता को ही फैसला लेना होगा कि वो किसका साथ देगी।

 


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