कोरोना को हराने के लिए देशवासियों ने पीएम मोदी का दिया कुछ ऐसे साथ

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मोदी जी ने भी देश की जनता की भलाई वो फैसला लिया है जो दुनिया के बड़े बड़े देश न ले सके। वो जानते थे कि अगर लॉकडाउन का फैसला किया तो इसका सीधा असर देश की माली हालत पर पड़ेगा लेकिन मोदी जी ने देशवासियों की जान को कीमती समझकर ये कठोर फैसला लिया है। देशवासियों का उनको साथ भी मिल रहा है। 

देश के नाम संदेश में पीएम मोदी ने साफ किया कि अगर हम 21 दिन नही रुके तो 21 साल पीछे चले जायेगे। ऐसे में वायरस से निपटने के लिये सभी को समाजिक दूरी बनानी होगी। बस पीएम मोदी की एक आवाज पर देश इस विपदा के वक्त उनके साथ खड़ा हो गया। जिसकी कई तस्वीर देश भर से देखने को मिली जिसकी चर्चा हम आप से करते है। 

सोशल डिस्टेंसिंग का सबक

सोशल डिस्टेंसिंग के पीएम मोदी के भाव को समझते हुए दूध लेने आये लोगो ने खुद ब खुद एक दूसरे से 1 मीटर की दूरी बनाकर खड़ा होना तय किया। ऐसे एक नही देशभर से कई तस्वीर आई जिसमें लोग सामान खरीदने के लिये एक दूसरे से दूरी बनाकर खड़े दिखे फिर वो दूध की दुकान हो या फिर पूजा सामग्री की ही क्यो न हो, लोगों ने पीएम की अपील को सिर माथे से लिया और विशेष काम के चलते ही बाहर निकले। बल्कि एक दूसरे को घर में रहने की सलाह देते हुए भी दिखाई दिये। गुजरात के एक शहर की किराने की दुकान की तस्वीर साफ बता रही है कि देश कि सरकार के साथ आम लोग भी इस महामारी से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। तभी तो ये लोग कोरोना के सुरक्षा घेरे में शॉपिंग करते नजर आए।

सब्र से जीतेंगे कोरोना की लड़ाई

पीएम मोदी ने जो 21 दिन का लॉक डाउन वक्त तय किया है उसके पीछे भी एक राज़ छुपा हुआ है। मनोवैज्ञानिकों की माने तो अगर हम कोई प्रण लेते है तो वो 21 दिन तक चलता क्योकि 21 दिन के भीतर  हमारे अंदर वो क्षमता आ जाती है जिसके चलते हम विजय हो सकते है। विजय होने के लिए 21 दिन का सब्र हमे इस महामारी से बचायेगा। हालाकि अगर हम गौर करे तो 14 अप्रैल के ये 21 दिनों में हम सिर्फ 13 दिन ही अपने घरों में होगे क्योकि अगर आम दिन की तरह काम हो रहा होता तो 21 दिनों में 3 रविवार अवकाश के है तो 25 मार्च गुड़ीपड़वा, 2 अप्रैल रामनवमी, 6 अप्रैल महावीर जयंती, 10 अप्रैल गुड फ्राइडे और 14 अप्रैल अंबेडकर जयंती है। मोटा मोटा देखा जाये तो 13 दिन का अवकाश ही हमे घरों में रहकर गुजारना है जिससे हम देश की सेहत ठीक रख सके।

हां, ये जरूर है कि मोदी सरकार ने साफ तौर पर राज्य सरकारों से कह रखा है कि अगर कोई लॉकडाउन को तोड़ता है तो उसपर सख्त कार्यवाही भी की जाये क्योकि वो अपने साथ साथ अपने परिवार और देश का भी घाटा  करवा सकता है। समाजिक दूरी बरकरार रखने के लिये केवल जनता ही नही बल्कि सरकार भी सामने आई जिसका असर कैबिनेट बैठक में देखा गया जहां हर मंत्री और पीएम के बीच में दूरी बनाई गई और ये संदेश दिया गया कि इस तरह से ही कोरोना से जंग जीती जा सकती है। वैसे अगर हम इतिहास में जाये तो हमने पहले भी ऐसे घातक वायरस से जंग लड़ी है और दुनिया को दिखाया भी है कि हम जीते है फिर क्या इस बार भी जीत हमारे साथ होगी। क्योकि न हमारे प्रधान हारते है और न वो देश को हारने देगे। 

 

 


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