सीतारमण का बज़ट भाषण सबसे लम्बे भाषणों में एक, बिना पानी पिए दिया दो घंटे भाषण

PM मोदी की जितनी भी तारीफ करो कम है| वो अपने दमदार व्यक्तित्व के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं| और जितने दमदार मोदी हैं, उतने ही खास उनके कैबिनेट के मंत्री भी है| आज हम अपने पाठकों को वर्तमान में वित्त मंत्रालय संभाल रही, पूर्व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के बारे में बताना चाहते है|

One of the longest speeches

5 जुलाई 2019 को संसद में भाजपा सरकार के दुसरे कार्यकाल का पहला बज़ट पेश किया गया| इस बार यह बज़ट पहली बार महिला वित्त मंत्री बनी निर्मला सीतारमण ने पेश किया|

बड़े काम से पहले संस्कार की झलक

निर्मला सीतारमण बज़ट पेश करने के लिए लोकसभा में करीब सुबह 10:55 बजे पहुंची| ऐसा पहली बार हुआ जब किसी महिला ने संसद में बज़ट पेश किया हो तो ज़ाहिर सी बात शुभकामनाएं देनी तो बनती है, इसीलिए निर्मला सीतारमण जब अपनी सीट पर बैठीं तो कई महिला सांसदों ने उनके पास आकर उनको शुभकामनाएं दीं| बज़ट पेश करने से पहले निर्मल सीतारमण ने अपनी माँ सावित्री, पिता नारायणन सीतारमण और पत्रकार बेटी वांगमयी पारकला का अभिवादन किया|

भाषण में अनेकता में एकता का समावेश

निर्मल सीतारमण ने अपने भाषण की शुरुआत मशहूर शायर मंजूर हाशमी की एक पंक्ति के साथ की “यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओर भी लेकर चिराग जलता है|” उन्होंने अपने पुरे भाषण में कई भाषाओ (हिंदी, उर्दू, संस्कृत और यहां तक कि तमिल भी) को शामिल किया| एक बार जब निर्मला सीतारमण ने हिंदी में ग्रामीण कारीगरों पर कुछ घोषणाएं की तो सदन तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा|

सबसे लम्बे भाषणों में से एक

निर्मला सीतारमण का भाषण कई मायनों में खास था| अब तक बोले जाने वाले सबसे लम्बे भाषणों में निर्मला सीतारमण के भाषण की गिनती हो रही है| सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि जब निर्मला सीतारमण ने लोक सभा में बज़ट पढना शुरू किया, तो लगातार 2 घंटे 5 मिनट तक बोलती रही और इस दौरान उन्होंने एक बार भी पानी नहीं पिया| उनकी इस क्षमता छमता को देखकर संसद में हर कोई हतप्रभ रह गया|

गौर करने वाली बात रही कि 2019 सरकार के पहले बज़ट के इस खास मौके पर विपक्ष के कई नेता संसद से नदारद थे| इस दौरान यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव सदन में नहीं थे, वहीँ दूसरी और राज्यसभा के लिए आरक्षित गैलरी लगभग भरी हुई थी| जहाँ एक तरफ विपक्ष के नेताओ की अनुपस्थिति दिखी, वहीँ दूसरी तरफ इस एतिहासिक मौके का साक्ष्य बनने के लिए उच्च सदन के कई सांसद मौजूद रहे; जिनमे डी राजा, कुमार केतकर, नरेंद्र जाधव, के अल्फोंस, माजिद मेमन और स्वपन दासगुप्ता शामिल थे| इनके अलावा कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी इस दौरान लोक सभा में मौजूद रहे|