‘साइलेंट किलर पनडुब्बी’ INS खंडेरी नौसेना में शामिल

INS Khanderi in Mumbai

भारत की दूसरी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस ‘खंडेरी’ शनिवार को मुंबई के मझगांव डॉक्स में आयोजित एक समारोह में भारतीय नौसेना में शामिल की गई।

इस आयोजन के दौरान मौजूद केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना को पनडुब्बी का कमीशन दिया। रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि वह आज के दिन विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर ही रहेंगे।आईएनएस खंडेरी के नौसेना में शामिल होने से भारत की नेवी की क्षमता में कई गुणा इजाफा होने होगा। आईएनएस खंडेरी में 40 से 45 दिनों तक सफर करने की क्षमता है।

“खांडेरी नाम खूंखार ‘तलवार दांत मछली’ से प्रेरित है, जो समुद्र के तल के करीब पहुंचकर शिकार करने के लिए जानी जाने वाली एक घातक मछली है। खांडेरी छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा निर्मित एक द्वीप किले का भी नाम है। वह एक था। सिंह ने कहा कि देश में कुछ मध्यकालीन शासकों ने नौसेना के वर्चस्व के महत्व को समझा, उनमे छत्रपति शिवाजी एक थे।

खांदेरी भारत में निर्मित नौसेना की छह कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बियों में से दूसरी है। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक हमला पनडुब्बी है जिसे फ्रांसीसी नौसेना की रक्षा और ऊर्जा कंपनी DCNS द्वारा डिज़ाइन किया गया है जिसे मुंबई में मझगांव डॉक्स में बनाया गया है।

राजनाथ सिंह ने INS खंडेरी के निर्माण में फ्रांस के साथ भारत के सहयोग की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा “फ्रांसीसी नौसैनिकों के साथ हमारी विशेष साझेदारी नई ऊंचाइयों को छुएगी। पनडुब्बी के निर्माण से उद्योगों को अप्रत्यक्ष रूप से मेक इन इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से लाभ हो रहा है। हमारी सरकार हमारे रक्षा बलों की जरूरतों के लिए सतर्क है और हम इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

Special Features of Khanderi

‘साइलेंट किलर’ की विशेषताएं:

 67 मीटर लंबी, 6.2 मीटर चौड़ी और 12.3 मीटर की ऊंचाई वाली पनडुब्बी का कुल वजन 1550 टन है।
 इसमें 36 से अधिक नौसैनिक रह सकते हैं।
 खंडेरी सागर में 300 मीटर की गहराई तक जा सकती है।
 कोई रडार इसका पता नहीं लगा सकता है।
 खंडेरी एक समय में पानी के नीचे 1020 किमी का सफर तय कर सकती है।
 खंडेरी बैटरी पर चलने वाली पनडुब्बी है।
 लंबे समय तक पानी में रहने के लिए इसमें 360 बैटरी लगाई गई हैं।
 बैटरी को चार्ज करने के लिए इसमें 1250 किलोवाट वॉट्स के 2 डीजल जनरेटर लगाए गए हैं।
 बगैर आवाज किए यह पानी में चलने वाली विश्व की सबसे शांत पनडुब्बियों में से एक है।
 रडार आसानी से इस साइलेंट किलर का पता नहीं लगा सकते हैं।

इस स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी की अत्याधुनिक विशेषताओं में दुश्मन पर सटीक हमला करने वाले हथियारों का उपयोग करने की क्षमता है। हमले को टारपीडो, साथ ही ट्यूब-लॉन्च एंटी-शिप मिसाइलों के साथ, पानी के नीचे या सतह पर लॉन्च किया जा सकता है। कई पनडुब्बियों द्वारा बेजोड़ स्टेल्थ सुविधाएँ इसे एक अजेयता प्रदान करती है ।

INS कलवरी प्रोजेक्ट 75 के तहत निर्मित छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों में से पहली थी। कलवरी पनडुब्बी को 14 दिसंबर, 2017 को कमीशन किया गया था।