आखिर किस बात की जिद है?

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कोरोना वायरस से आज पूरी दुनिया ग्रस्त है, हजारों की संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। हर देश में ये ऐलान किया जा रहा है कि भीड़ न इकट्ठा करे और ऐसी जगह से भी बचे जहां भीड़ हो, लेकिन इसके बावजूद भी शाहीन बाग में बैठे लोग सिर्फ हठधर्मिता के चलते धरने पर बैठे है।

आखिर क्यो? किस बात की जिद है? क्यो सबकुछ जानकर शाहीन बाग में धरना में बैठे लोग कई लोगों की  जिंदगी के साथ खेलने में लगे है? जब सारी दुनिया कोरोना वायरस से बचने के लिए भीड़ वाली जगह पर न जाकर एक संदेश दे रही है, तो क्यो ये लोग भीड़ इकट्ठा करके देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ाने में लगे है। समझ में ये नही आता कि ये लोग आखिर क्यो नही सुन रहे है। ऐसे में तो लगता यही है कि ये लोग सिर्फ मोदी सरकार के विरोधी नही, बल्कि सारे मानव समाज के दुश्मन है। ऐसे में अब समझ में आ रहा है कि कितना जहर इन लोगो के दिल ओ दिमाग में भरा गया है कि वो अपने साथियों के दुश्मन बन बैठे है।

 

सरकार की साजिश बताते प्रदर्शनकारी

कोरोना को लेकर जहां सरकार समूचे देश में युध्द स्तर में निपटने में लगी है तो शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी इसे सरकार की साजिश बताने में लगे है जिसे सुनकर सिर्फ हंसी ही निकलती है। वो कहते है कि कोरोना का डर उनके धरने को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा फैलाया गया है। हालांकि कोरोना वायरस के खौफ से भीड़ अब कम होने लगी है। धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों की संख्या कम देखी गई है। यहां पर कुछ महिलाएं ही दिख रही है, धरना स्थल पर तख्त रखा गया है जिन पर कुछ महिलाएं बैठी हैं। जबकि कुछ लोग मास्क पहने भी दिखाई दिए। भय इनके दिलों में भी है लेकिन जो लोग इन्हे भड़का रहे है वो अभी भी अपनी साजिश में कामयाब है जबकि वो खुद कोरोना के डर के मारे छुपे हुए है।

पुलिस ने समझाया पर नहीं माने प्रदर्शनकारी

दुनिया भर में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए सरकारें भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में न जाने की अपील कर रही हैं। सरकार ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, प्रदर्शन से दूर रहने की बात कर रही है। वही देश ही नही दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने भी तय किया है कि कोरोना के चलते वो भी कोई बड़ी सभा या धरना का कार्यक्रम नही करेगी। लेकिन इसके बावजूद शाहीन बाग के लोग मानने को तैयार नही हो रहे है। वायरस को लेकर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की प्रदर्शनकारियों से तीखी बहस हो गई। अधिकारियों ने वायरस के खतरे को देखते हुए प्रदर्शन को खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भीड़ से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यह प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ आम नागरिकों के जीवन के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इस पर प्रदर्शनकारी भड़क उठे और बोले धरना जारी रहेगा।

ऐसे में उस कहावत का मतलब जरूर समझ में आता है जिसमें बोला गया है कि विनाशकालीन विपरीत बुद्धि जिसका मतलब शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारियों को देखकर होता है।


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