आर्थिक मोर्चे पर राहत भरा रहा सितंबर का महीना

6 महीने के इंतजार के बाद एकबार फिर अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छी खबर आ रही है। सितंबर महीने में एक साथ कई आर्थिक मोर्चे पर बढ़ोतरी देखी गई।  इनमें रोजगार के लिए सबसे जरूरी मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स से लेकर राजस्व के लिए जरूरी GST  कलेक्शन तक शामिल हैं। देश के GDP में 7 फीसद की हिस्सेदारी रखने वाले ऑटो सेक्टर में भी बूम देखा जा रहा है। किस किस सेक्टर से अच्छी खबर मिल रही है चलिये हम आपको बताते है।

 

ऑटो सेक्टर ने पकड़ा बूम

सबसे पहले बात करते है ऑटो सेक्टर की जिसपर कोरोना काल में सबसे ज्यादा मार पड़ती हुई दिखाई दी थी लेकिन अब ये सेक्टर भी उबरने में लग गया है। जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर काफी खुश नजर आ रहा है। देश के मोटर वाहनों में 50 फीसद से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली मारुति सुजुकी की घरेलू बिक्री में सितंबर में पिछले साल सितंबर के मुकाबले 32.2 फीसद की बढ़ोतरी रही। दूसरी कंपनियों की बिक्री में भी छलांग दिखी है।

GST में हुआ इजाफा

कोरोना काल में देश में लगे लॉकडाउन के चलते उत्पादन में काफी गिरावट देखी जा रही थी जिसका असर GST पर भी साफ दिख रहा था लेकिन सितंबर महीना सरकार के लिए राहत भरी खबर लाया है। वस्तुओं की बिक्री से सीधे तौर पर जुड़े जीएसटी का कलेक्शन इस साल सितंबर माह में 95,480 करोड़ रहा जो पिछले साल सितंबर के मुकाबले 4 फीसद अधिक है और इस साल अगस्त के मुकाबले यह 9 फीसद अधिक है। जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी से सरकार को राजस्व के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी और वित्तीय घाटे में कमी आएगी।

माल ढुलाई में बढोत्तरी से रेलवे को मिली राहत

वैसे रेलवे ही एक ऐसा विभाग रहा है जो लॉकडाउन के वक्त अपना काम करता रहा है। लेकिन यात्री गाड़ियों के न चलने के चलते रेलवे को भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ा इसपर भी कोई संदेह नही है। पर अब मांग निकलने और सप्लाई चेन दुरुस्त होने से सितंबर माह में रेलवे से 1021 लाख टन माल की ढुलाई की गई जो पिछले साल सितंबर के 885 लाख टन के मुकाबले 15 फीसद अधिक है। इस कारण माल ढुलाई से रेलवे को सितंबर में 14 फीसद अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई।

बिजली औऱ पेट्रोल की मांग में दिखने लगा इजाफा

कोरोना काल में कल-कारखानों के बंद हो जाने के चलते बिजली औऱ पेट्रोल की मांग अपने निम्न स्तर तक पहुंच चुकी थी पर सितंबर में इसमे कुछ सुधार दिखने लगा है जिससे कयास लगाया जा रहा है कि देश में फैक्टरियों की सुस्त चाल न अब रफ्तार पकड़ ली है। तभी फरवरी के बाद पहली बार सितंबर में बिजली के उत्पादन में बढ़ोतरी दिखी है पॉवर सिस्टम ऑपरेशन कारपोरेशन के मुताबिक इस साल सितंबर में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बिजली उत्पादन में 4.9 फीसद की बढ़ोतरी रही। जबकि खपत में पिछले साल के मुकाबले 5.6 फीसद की बढ़ोत्तरी दिखी। कोयले के उत्पादन में भी सितंबर में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है क्योंकि इस साल अगस्त में कोयले के उत्पादन में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3.6 फीसद का इजाफा देखा गया। जो औद्योगिक गतिविधियों में इजाफे को बताती है। काम धंधे में बढ़ोतरी से सितंबर में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2 फीसद अधिक रही। इस साल मार्च के बाद पहली बार पेट्रोल की खपत में पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है। हालांकि इस साल सितंबर में डीजल की बिक्री पिछले साल सितंबर के मुकाबले 7 फीसद कम रही,  लेकिन इस साल अगस्त के मुकाबले डीजल की बिक्री 22 फीसद अधिक हुई।

मोदी सरकार की कोशिश अब साफ तौर पर रंग लाने लगी है। जिसका नतीजा सितंबर महीने में दिखा है. लेकिन अभी सफर बहुत लंबा है और बिना रुके, बिना थके इसपर तेजी से चलते जाना है