मोदी-शाह की नीति ब्लॉकबस्टर साबित हुई, अलगाववादी और राजनीतिक दल अब बिना शर्त बातचीत के लिए तैयार

आर्टिकल 370 का कश्मीर से ख़त्म होना सिर्फ सरकार के लिए ही नहीं बल्कि समूचे देश के लिए किसी ऐतिहासिक जीत से कम नहीं था | आर्टिकल 370 का ख़त्म होना हर किसी का सपना था जिसे मोदी-शाह की नीति ने हकीकत बना दिया | बीते 60 साल की अपनी सरकार में कांग्रेस ने जिस मुद्दे के बारे में सोचा न होगा उसे मोदी ने अपने दुसरे कार्यकाल के पहले ही साल में कर दिखाया |

separatists and political parties now ready for unconditional dialogue

मोदी-शाह का कश्मीर शो ब्लॉकबस्टर साबित हुआ | कयास तो ये भी लगाये गए और बयानबाज़ी भी की गयी की इस फैलसे के बाद कश्मीर के हालत बिगड़ सकते है | पर मोदी-शाह के फुल-प्रूफ प्लानिंग से आर्टिकल 370 हटने के बाद भी कश्मीर का माहौल बेहद ही शांतिपूर्ण और खुशनुमा बना रहा | और अब खबर ये भी आ रही है की घाटी में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, अलगाववादी संगठनों के प्रतिनिधि और दूसरे सामाजिक संगठन बातचीत करने के लिए तैयार है | इस बात की जानकारी खुद राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकारों ने दी है | इस बात की जानकारी गृह मंत्रालय को भी दी गयी और उन्हें बताया गया है की संगठन बिना किसी शर्त के मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हैं | ये मोदी-शाह के कश्मीर नीति की एक और जीत है |

डोभाल ने कश्मीर के हालत सामान्य रखने में निभाई अहम् भूमिका

आर्टिकल 370 ख़त्म करने के बाद सरकार के पास से सबसे बड़ी चुनौती थी घाटी के हालत सामान्य रखना | और इसीलिए आर्टिकल 370 ख़त्म करने से पहले ही NSA ने कश्मीर का दौरा किया और हालातों का जायजा लिया | इतना ही नहीं घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबल की तैनाती भी डोभाल का ही सुझाव था | साथ ही आर्टिकल 370 ख़त्म होने के बाद भी डोभाल 9 दिन तक घाटी में रहे और घाटी के ज़मीनी हालातों का पूरा जायजा लिया | घाटी के हालातों को सामान्य रखने के लिए डोभाल ने मौलवियों, सरपंचों और दूसरे संगठनों के प्रतिनिधियों से खुलकर बातचीत की | कश्मीर की ताजा ख़बरों के अनुसार आर्टिकल 370 हटाने के बाद घाटी में जो पाबंदियां लगायी गयी थी वो अब हट चुकी है | और घाटी में ज़िन्दगी धीरे-धीरे अपनी पटरी पर वापस आ रही है |

अधिकारी सुनेंगे लोगों की शिकायतें

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घाटी में जनता की परेशानी को नियमित सुनने के लिए जल्द ही घाटी में राज्यपाल के चार सलाहकार उपलब्ध करवाए जायेंगे | इन सलाहकारों को जम्मू में अलग-अलग दिन पर जनता के बीच उपलब्ध करवाया जायेगा जिनमे जम्मू में के.विजय कुमार गुरुवार, के.के. शर्मा मंगलवार, के. स्कंदन शुक्रवार और फारूख खान सोमवार को कैनाल रोड स्थित बैंक्वट हाल में सुबह 10 से 12 बजे तक मौजूद रहेंगे | इसी तरह श्रीनगर में के.विजय कुमार मंगलवार, के.के. शर्मा शुक्रवार, के. स्कंदन सोमवार और फारुख खान गुरुवार को लोगों की समस्याएं सुनेंगे |

अलगाववादियों ने बिना किसी शर्त जताई बातचीत की इच्छा

राज्यपाल के सलाहकारों से मिली जानकारी के मुताबिक इस समय कश्मीर में कोई भी राजनितिक पार्टी सक्रिय नहीं है पर पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच हलचल साफ़ नज़र आ रहा है | सामने से न सही पर अनौपचारिक तौर से नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के स्थानीय नेता राज्यपाल के सलाहकारों से मुलाकात कर चुके है और सरकार से बातचीत करने की इच्छा भी ज़ाहिर कर चुके है | दूसरी तरफ अलगाववादी नेता भी अब अपने जिद से परे हट कर सरकार से बातचीत की इच्छा ज़ाहिर कर रहे है|

एंटी टेरर बिल का खौफ साफ़ नज़र आ रहा है

बता दे की पुलवामा हमले के बाद ही सरकार ने कश्मीर में एंटी टेरर बिल पास कर दिया था जिसके बाद से इन अलगाववादियों की परेशानियाँ काफी बढ़ गयी है | अब इन अलगाववादियों को ये पता चला गया था की अब इन्होने किसी भी आतंकी गतिविधि को अंजाम दिया तो इन्हें भी आतंकवादी घोषित कर दिया जायेगा | और इसीलिए भी अब ये अपना जिद छोड़ कर सरकार के साथ बातचीत का मन बना रहे है | और अगर ऐसा हुआ तो बहुत जल्द कश्मीर भी अलगाववाद की बीमारी से मुक्त हो जायेगा |