शेयर बाजार ने रचा इतिहास: पहली बार सेंसेक्स 42000 के पार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। गुरुवार सुबह 16 जनवरी को शेयर बाजार ने इतिहास रच दिया। अमेरिका और चीन के बीच पहले चरण का ट्रेड डील के बाद भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेजी के रुझानों के बीच सेंसेक्स पहली बार 42,000 के पार चला गया और निफ्टी भी नई उंचाई को छुआ। सुबह 10.22 बजे सेंसेक्स पिछले सत्र से 99.71 अंकों की तेजी के साथ 41,972.44 पर बना हुआ था और निफ्टी भी 20.85 अंकों की तेजी के साथ 12,364.15 पर कारोबार कर रहा था। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक मसलों को लेकर बुधवार को पहले चरण के करार पर हस्ताक्षर हुए।

इससे पहले बंबई स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र के मुकाबले तेजी के साथ 41,924.74 पर खुला और 42,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़कर रिकॉर्ड 42,059 तक उछला। सेंसेक्स पिछले सत्र में 41,872.73 पर बंद हुआ था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र के मुकाकले तेजी के साथ 12,347.10 पर खुला और कारोबार के दौरान 12389.05 तक उछला जोकि अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। निफ्टी पिछले सत्र में 12,343.30 पर बंद हुआ था।

रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि पीएम मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया रिकॉर्ड

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। मोदीराज में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तीन जनवरी तक बढ़कर 461.157 अरब डॉलर के नए स्तर पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में वृद्धि की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 3.013 अरब डॉलर बढ़कर 427.949 अरब डॉलर हो गई। इस दौरान स्वर्ण भंडार भी 66.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 28.058 अरब डॉलर हो गया।

बता दे की विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

एफपीआई ने 2019 में किए 1.3 लाख करोड़ रुपए निवेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। देश में कारोबारी माहौल भी बेहतर हुआ है। यही वजह है कि देश में रिकॉर्डतोड़ विदेशी निवेश हो रहा है। मोदी सरकार की नीतियों की वजह से प्रभावित होकर अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों और पर्याप्त तरलता के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 2019 में भारतीय पूंजी बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2019 में भारतीय पूंजी बाजार में 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 2019 में घरेलू पूंजी बाजार में अब तक 1,33,074 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया है। एफपीआई ने इक्विटी में 2019 में 97,251 करोड़ रुपए का निवेश किया, जबकि 26,828 करोड़ रुपए के ऋणपत्रों की शुद्ध खरीदारी की। एफपीआई ने हाइब्रिड प्रतिभूतियों में 999 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।

मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई सात महीने के उच्चतम स्तर पर

कारखानों के नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी से विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार हुआ है। रोजगार के मोर्चे पर भी तेजी से सुधार हुआ है। नए ऑर्डर मिलने से उत्पादन में आए उछाल के चलते दिसंबर में पीएमआई 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग का पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक दिसंबर में बढ़ कर 52.7 रहा। मई के बाद यह सबसे ऊपर है। सूचकांक का 50 से ऊपर होना उत्पादन में विस्तार का सूचक है। विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई लगातार 29वें महीने 50 अंक से ऊपर है। जीएसटी कलेक्शन और कोर सेक्टर इंडस्ट्रीज के बेहतर आंकड़ों से दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार देखने को मिला।

 


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