भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का दूसरा बड़ा वार

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नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 में सरकारी विभागों की सफाई यानी नाकारा अफसरों को निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। 12 वरिष्ठ आयकर अधिकारियों को बर्खास्त करने के बाद, मोदी सरकार ने अब सीमा शुल्क विभाग से 15 वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है।

न्यूज वायर एजेंसी एएनआई के अनुसार, बर्खास्त किए गए कुछ अधिकारियों में प्रिंसिपल कमिश्नर, कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम्स (CBIC) के रैंक शामिल हैं। मंगलवार, 18 जून को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और कस्टम (Central Board of Indirect Taxes and Customs) विभाग के जबरन रिटायर किए गए अफसरों का पद और नाम इस प्रकार है- प्रिंसिपल कमिश्नर डॉ. अनूप श्रीवास्तव, कमिश्नर अतुल दीक्षिदत, कमिश्नर संसार चंद, कमिश्नर हर्षा, कमिश्नर विनय व्रिज सिंह, अडिशनल कमिश्नर अशोक महिदा, अडिशनल कमिश्नर वीरेंद्र अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर अमरेश जैन, ज्वाइंट कमिश्नर नलिन कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस पाब्ना, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस बिष्ट, असिस्टेंट कमिश्नर विनोद सांगा, अडिशनल कमिश्नर राजू सेकर डिप्टी कमिश्नर अशोक कुमार असवाल और असिस्टेंट कमिश्नर मोहम्मद अल्ताफ।

इन सभी अधिकारियों पर पद पर रहते हुए नियमावली के विपरीत कार्य करने का दोषी पाया गया है। सरकार ने विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा सिफारिश मिलने के बाद ऐसा करने का निर्णय लिया है।

पिछले हफ्ते सरकार ने भ्रष्टाचार और पेशेवर कदाचार के आरोप में संयुक्त आयुक्त रैंक के एक सहित 12 वरिष्ठ आयकर अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। उस मीडिया रिपोर्ट के बाद दावा किया गया कि इस तरह के और भी बर्खास्तगी भविष्य में हो सकते हैं। ये सभी बर्खास्तगी केंद्र सरकार की सेवाओं के सामान्य वित्तीय नियमों के नियम 56 (जे) के तहत सेवानिवृत्ति का आदेश दिया गया है।

क्या है नियम 56?

दरअसल, रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है। इस नियम के तहत गजटेड (राजपत्रित) अधिकारी जैसे आईएएस, आईपीएस और ग्रुप ए के अधिकारियों के साथ ही नॉन-गजटेड (गैर-राजपत्रित) अधिकारियों को भी जबरन सेवानिवृति दी जा सकती है।

भ्रष्टाचार, यौन शोषण का आरोप, अवैध और बेहिसाब संपत्ति के आरोप लग चुके अधिकारियों पर आने वाले दिनों में भी रूल 56 का इस्तेमाल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा नाकारा और भ्रष्ट अफसरों को सेवा से मुक्त करना है।