SCO की बैठक, सामने था इमरान खान, फिर मोदी ने कट्टरपंथ को लेकर खूब सुनाया

सांप भी मर जाये औऱ लाठी भी ना टूटे इस कहावत को पीएम मोदी ने आज संघाई सहयोग संगठन की बैठक में पूरा कर के दिखाया है जब चीन और पाक के नेताओं को सामने उन्होने कट्टरपंथ पर जोरदार हमला बोला और उनका साथ देने वाले को आगह किया कि वो गलत रास्ते पर चल रहे है।

शांति, सुरक्षा और विश्‍वास की कमी से जुड़ी चुनौतियां बढ़ता हुआ कट्टरपंथ

शंघाई सहयोग संगठन में मोदी जी जब बोल रहे थे तो पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी उन्‍हें सुन रहे थे। पीएम मोदी ने अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि शांति, सुरक्षा और विश्‍वास की कमी से जुड़ी चुनौतियां बढ़ता हुआ कट्टरपंथ हैं। मोदी ने कहा कि अफगानिस्‍तान के हालात इस चुनौती को और स्‍पष्‍ट करते हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रमों ने कट्टरपंथ से उत्पन्न चुनौती को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और विश्वास के लिए जरूरी है बल्कि युवाओं का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है। पीएम मोदी ने एससीओ सम्मेलन में अपनी बात नए मित्र देशों के स्वागत के साथ किया। उन्होंने कहा, ‘इस साल हम SCO की भी 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह खुशी की बात है कि इस शुभ अवसर पर हमारे साथ नए मित्र जुड़ रहे हैं। मैं ईरान का SCO के नए सदस्य देश के रूप में स्वागत करता हूँ। मैं तीनों नए डायलॉग पार्टनर्स, साऊदी अरब, इजिप्ट और कतर का भी स्वागत करता हूं।’

SCO करे एक मजबूत नेटवर्क बनाने का काम

अपने संबोधन में उन्होंने कहा, एससीओ को इस्लाम से जुड़े उदारवादी, सहिष्णु तथा एवं समावेशी संस्थानों और परम्पराओं के बीच मजबूत सम्पर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत में और SCO के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदारवादी, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएं हैं। SCO को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। इस सन्दर्भ में मैं SCO के RATS तंत्र द्वारा किए जा रहे उपयोगी कार्य की प्रशंसा करता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि हम इतिहास पर नज़र डालें, तो पाएंगे कि मध्य एशिया का क्षेत्र उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का गढ़ रहा है। सूफीवाद जैसी परम्पराएं यहां सदियों से पनपी और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं। इनकी छवि हम आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में देख सकते हैं।

भारत सेंट्रल एशिया के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध

एशियाई क्षेत्र में संयोजन पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत सेंट्रल एशिया के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि लैंड लॉक्ड सेंट्रल एशियाई देशों को भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अपार लाभ हो सकता है। कनेक्टिविटी की कोई भी पहल एक तरफा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास सुनिश्चित करने के लिए कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को परामर्शी, पारदर्शी और भागीदारी वाला होना चाहिए। इनमें सभी देशों की टेरीटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान निहित होना चाहिए।

पीएम मोदी ने जो विचार आज रखे वो कही ना कही आतंकवाद को समर्थन देने वाले के एक सख्त संदेश है कि दुनिया ज्यादा दिन तक या कोई भी विश्व संगठन आतंकवाद को सहारा देने वाले को बर्दाशत नहीं कर सकती है।