विज्ञान, अंधविश्वास और भगवान – इसरो से जुड़ी कुछ रोचक बातें

 ISRO Chandrayaan-2

हमेशा ये कहा जाता है कि जब किसी नए काम की शुरुआत करो तो घर के बड़ों और भगवान के आशीर्वाद के साथ करो| यहीं नहीं घर में माताएं हमेशा अपने बच्चों को उनके नए काम की या परीक्षा की शुरुआत के पहले दही-चीनी खिलाती है, ऐसी मान्यता है कि इससे कोई भी कार्य अच्छे तरीके से होता है| अब इसे अन्धविश्वास कहें या उनकी आस्था, लेकिन ये हमारी पुरातन संस्कृति का हिस्सा है।

ISRO ने आज श्रीहरिकोटा से चंद्रयान2 का प्रक्षेपण किया| पर ISRO के वैज्ञानिकों ने भी चंद्रयान 2 के प्रक्षेपण से पहले कई मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन किये और चंद्रयान के सफल प्रक्षेपण के लिए भगवान से आशीर्वाद ग्रहण किया| मुद्दे की बात ये है कि यहाँ विज्ञानं और भगवान यहाँ एक साथ नज़र आये| ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, ISRO के वैज्ञानिक अपने हर मिशन के लांच से पहले भगवान का आशीर्वाद लेते रहे हैं।

तिरुपति में भगवान वेंकटेश की पूजा

ISRO chairman K Sivan has visited Tirumala Tirupati temple

सूत्रों के अनुसार ISRO के प्रमुख वैज्ञानिक हर मिशन के लांच से पहले आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी के नाम से मशहूर भगवान वेंकटेश की पूजा अर्चना करते हैं, साथ ही यहाँ पर लॉन्च किए जाने वाले रॉकेट का एक छोटा सा नमूना भी भगवान को चढाया जाता है, और इसके सफल प्रक्षेपण की कामना की जाती है|

नई कमीज़ पहनने की परंपरा

हर मिशन के लौन्चिंग के दिन उस मिशन के सम्बंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर नई कमीज़ पहनते हैं| इस परम्परा को सालों से निभाया जा रहा है, हालाँकि इसे धर्म से किसी भी प्रकार से नहीं जोड़ा गया है |

मशीनों पर त्रिपुंड और मंगलवार

भगवान शंकर की आराधना और आशीर्वाद लेने के लिए ISRO मिशन के सभी यंत्रों पर कुमकुम से त्रिपुंड बनाने की परंपरा है| वहीँ ISRO के किसी भी मिशन को मंगलवार को लांच नहीं किया जाता था क्योंकि मंगलवार को मिशन के लांच के लिए शुभ नहीं माना जाता। हालाँकि मंगल मिशन के लांच के दिन ऑर्बिटर ने मंगलवार को ही उड़ान भरी थी और पहली बार इस परंपरा को तोडा गया था|

’13’ माना जाता है अशुभ

नासा के अपोलो 13 मिशन के नाकाम होने के बाद से ही पूरी दुनिया की स्पेस एजेंसियां 13 संख्या को अशुभ मानती हैं| इसीलिए रॉकेट पीएसएलवी 12 के बाद इसरो ने पीएसएलवी 13 नहीं बल्कि पीएसएलवी 14 का निर्माण किया था|

उल्टी गिनती को लेकर भी है परंपरा

ISRO के वैज्ञानिक रहू काल पर विश्वास रखते हैं, और इनके अनुसार इन डेढ़-दो घंटों में किसी शुभ काम को अंजाम नहीं देते। इसीलिए इसरो के वैज्ञानिक रॉकेट लॉन्च करने के लिए इस दौरान उल्टी गिनती की शुरुआत करते है|

अब इसे वैज्ञानिको का विश्वास कहें या आस्था, पर इन मान्यताओ और परम्पराओं को हर मिशन के प्रक्षेपण के पहले निभाया जाता है| एक बार जब भारत रत्न से सम्मानित वरिष्ठ और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सीएनआर राव से इस बारे में पुछा गया तो उन्होंने बताया कि ये सब अन्धविश्वास की बातें है| उनका मानना है कि जब इन्सान डरा हुआ होता है तो वो प्रार्थनाओ का सहारा लेता है|

ऐसा भी नहीं है की ये टोटके सिर्फ ISRO द्वारा किये जाते हैं। बता दें की NASA के वैज्ञानिक भी किसी भी मिशन के लांच के पहले जेट प्रोपल्शन के लैब में बैठकर मूंगफली खाते हैं| रूसी अंतरिक्ष यात्री भी एक टोटका करते है जिसमे वो उस बस के पिछले पहिये पर पेशाब करते है जो उन्हें लॉंच पैड तक ले जाती है|

खैर ये एक ऐसा मुद्दा जिस पर हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया बिलकुल अलग होती है| अभी हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण ये है कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सफलतापुर्वक हो गया है और आज का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक है।