सुप्रीम कोर्ट के दखल से प्राइवेट कर्मचारियों के पेंशन में भारी वृद्धि का रास्ता साफ़

• मौजूदा दौर में ईपीएफओ 15,000 रुपये वेतन की सीमा के साथ योगदान की गणना करता है
• पीएफ फंड में आएगी कमी,अब ज्यादा हिस्सा पीएफ की जगह ईपीएस वाले फंड में जाएगा
• 1 सितंबर 2014 के बाद से काम शुरू करने वाले भी फुल सैलरी पर पेंशन का लाभ ले सकेंगे

वैसे लोग जो प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत है, उनके लिए यह खबर बेहद ख़ास है| सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट सेक्टर में काम करनेवाले कर्मचारियों के लिए पेंशन में बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आज ईपीएफओ द्वारा दायर किये गए उस याचिका को ख़ारिज कर दिया| जो केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर किया गया था| मालूम हो कि, हाईकोर्ट ने ईपीएफओ को ऑर्डर दिया था कि वह रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन दे।

पीएफ फण्ड हो सकता है कम

मौजूदा दौर में ईपीएफओ 15,000 रुपये वेतन की सीमा के साथ योगदान की गणना करता है। अब इससे प्रोविडेंट फण्ड में कमी आएगी, चूँकि अब ज्यादा हिस्सा पीएफ के जगह ईपीएस वाले फण्ड में चला जायेगा| हालाँकि, इसके बावजूद नए नियमो की वजह से पेंशन में इतना इजाफा हो जायेगा कि वो इस बीच के गैप को भर ही देगा|

पहले क्या था सिस्टम?

दरअसल, ईपीएस की शुरुआत साल 1995 में की गई थी| उस वक़्त, नियोक्ता कर्मचारी की सैलरी का अधिकतम सालाना 6,500 (541 रुपये महीना) का 8.33 पर्सेंट ही ईपीएस के लिए जमा कर सकता था। जब मार्च 1996 में इस नियम में बदलाव किया गया कि अगर कर्मचारी पूरी सैलरी के हिसाब से स्कीम में योगदान देना चाहे और नियोक्ता भी राजी हो तो उसे पेंशन भी उसी हिसाब से मिलनी चाहिए।

EPFO

साल 2014 में नियमों में बदलाव

साल 2014 के सितम्बर माह में ईपीएफओ ने फिर नियमों में बदलाव किए। जिससे अब अधिकतम 15 हजार रुपये का 8.33 फीसदी योगदान को मंजूरी मिल गई। हालांकि, इसके साथ यह नियम भी लाया गया कि अगर कोई कर्मचारी पूरी वेतन पर पेंशन लेना चाहता है तो उसकी पेंशन वाली वेतन पिछली पांच साल की सैलरी के हिसाब से तय होगी। इससे पहले तक यह पिछले साल की औसत आय सैलरी पर तय हो रहा था। जिससे कई कर्मचारियों की वेतन में कमी पायी गयी|

इससे इतर जब फिर मामले कोर्ट में पहुंचने लगे। तब केरल हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2014 को हुए बदलाव को रद्द करके पुराना सिस्टम चालू कर दिया। इसके बाद पेंशन वाली सैलरी पिछले साल की औसत सैलरी पर तय होने लगी। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ से कहा कि इसका फायदा उन लोगों को भी दिया जाए जो पहले से फुल सैलरी के बेस पर पेंशन स्कीम में योगदान दे रहे थे। इस फैसले से कई कर्मचारियों को फायदा हुआ। एक प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले प्रवीण कोहली की पेंशन जो सिर्फ 2,372 रुपये थी फैसले के बाद 30,592 रुपये हो गई। जिसके बाद कोहली ने बाकी कर्मचारियों को इसका फायदा दिलाने के लिए मुहिम भी चलाई थी|

इस सब के बावजूद फिर ईपीएफओ की आनाकानी शुरू हो गयी| ईपीएफओ ने उन कम्पनियों को इसका फायदा ने से मना कर दिया जिनका ईपीएफ ट्रस्ट द्वारा मैनेज होता है। मालूम हो कि नवरत्नों में शामिल ओएनजीसी, इंडियन ऑइल आदि कंपनियों का अकाउंट भी ट्रस्ट ही मेंटेन करता था, क्योंकि इसकी सलाह पहले ईपीएफओ ने ही दी थी।

हालांकि केरल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मद्रास आदि हाईकोर्ट्स में इससे जुड़े केस की बाढ़ आ चुकी थी और सबने ईपीएफओ को उन्हें भी स्कीम में शामिल करने के लिए कहा। इसी सन्दर्भ में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले से उम्मीद की जा रही है कि यह मामला अब पूरी तरह सुलझ गया है। इसके तहत जिन लोगों ने 1 सितंबर 2014 के बाद काम करना शुरू किया है वे भी फुल सैलरी पर पेंशन का लाभ ले सकेंगे। लिहाजा, यह खबर प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत कर्मचारियों के लिए बेहद राहत भरा है|