सनातन धर्म के मुरीद रूसी तीर्थयात्रियों ने मोक्षधाम गया में किया पिंडदान

 

पूर्वजों और पुरखों की मोक्ष प्राप्ति की स्थली के रूप में प्रसिद्ध गया में देशी और विदेशी सभी श्रद्धालु पितरों की मोक्ष की कामना के लिए गया पहुंचते हैं। बुधवार को रूस से 50 श्रद्धालु गया पहुंचे। गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के समीप देवघाट में रूस से आये सभी श्रद्धालुओं ने बुधवार को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपने पितरों के मोक्ष के लिए पूरे सनातन धर्म के विधि विधान के साथ कर्मकांड किया। ये महिलाएं अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की। गयापाल पुरोहित मुनीलाल कटरियार ने वैदिक मंत्रोच्चरण के साथ कर्मकांड कराया।

श्रद्धालुओं के दल का नेतृत्व कर रहे इस्कॉन मंदिर के जगदीश श्याम दास ने कहा कि पिंडदान के लिए रूस से श्रद्धालु पहुंचे थे। रूसी श्रद्धालु ऐलिना ने कहा कि भारत धर्म और आध्यात्म की धरती है। गया आकर मुझे शांति की अनुभूति हो रही है। मैं अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आई हूं। एक अन्य श्रद्धालु दरिया ने कहा कि मैं अपने परिवार और देश में शांति के लिए पिंडदान कर रही हूं।

इन सभी को विश्वास है कि कर्मकांड करने से इनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलेगी। इस दल की सभी रूसी महिलाओं ने साड़ी पहनकर भारतीय वेशभूषा में कर्मकांड किया।

कर्मकांड समाप्त होने के बाद विदेशी श्रद्धालु विष्णुपद मंदिर से गांधी मैदान स्थित इस्कॉन मंदिर तक पैदल पहुंचे। सभी श्रद्धालु हरिनाम कीर्तन करते हुए और कीर्तन के साथ हरि नाम गाते हुए नृत्य करते हुए मंदिर पहुंचे।

सनातन धर्म के प्रति देश के लोगों के साथ अब विदेशियों की आस्था भी लगातार बढ़ती जा रही है। विदेश के लोग सनातन धर्म को अपने जीवन में अंगीकार करने के साथ ही इसकी परम्पराओं का निर्वहन करने में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे हैं। और ये रूसी दल इसका ही एक उदाहरण पेश करता है।

आखिर क्यों करते हैं गया में पिंड दान

ऐसे तो देश के हरिद्वार, गंगासागर, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर सहित कई स्थानों में भगवान पितरों को श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध से मोक्ष प्रदान कर देते हैं, लेकिन गया में किए गए श्राद्ध की महिमा का गुणगान तो भगवान राम ने भी किया है। कहा जाता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए गया में ही पिंडदान किया था।

गया को विष्णु की नगरी माना जाता है। यह मोक्ष की भूमि कहलाती है। गरुड़ पुराण के अनुसार गया जाने के लिए घर से निकले एक-एक कदम पितरों को स्वर्ग की ओर ले जाने के लिए सीढ़ी बनाते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार गया में पूर्ण श्रद्धा से पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष मिलता है। मान्यता है कि गया में भगवान विष्णु स्वयं पितृ देवता के रूप में उपस्थित रहते हैं, इसलिए इसे पितृ तीर्थ भी कहते हैं।

गौरतलब है कि राजा दशरथ का पिंडदान गया में किया था और गरुड़ पुराण में भी इस धाम का जिक्र मिलता है इसलिए हर इंसान मृत्यु के बाद मुक्ति और शांति पाने के लिए गया में ही अपना पिंडदान कराने की इच्छा रखता है।

PC – Google