रूस ने भी चीन का छोड़ा साथ नहीं देगा एस-400 मिसाइल

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जब से चीन ने भारत से पंगा लिया है तब से ही चीन के दिन खराब शुरू हो गये हैं, तभी तो पहले अमेरिका लगातार ड्रैगन पर नकेल कस रहा था तो अब रूस ने भी चीन को बड़ा झटका देते हुए एस-400 मिसाइल प्रणाली का आर्ड रोक दिया है।

रूस ने चीन को दिया बड़ा झटका

भारत के खिलाफ विवाद शुरू करना चीन को काफी भारी पड़ रहा है। दुनिया भर के देशों ने चीन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई पाबंदियां लगा दी है। अब रूस ने भी चीन को एक बड़ा झटका देते हुए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एस-400 के ऑर्डर पर रोक लगा दी है। चीन के एक न्यूज पेपर के अनुसार  “रूस ने चीनी एस-400 प्रणाली के वितरण पर रोक लगाने की घोषणा की। रूस की घोषणा के बाद चीन ने बिना किसी का नाम लिए कहा है कि मास्को को इस तरह का निर्णय लेने के लिए मजबूर किया गया है। 2014 में चीन ने रूस के साथ सरकार से सरकारी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। यह सौदा 3 बिलियन डॉलर का था। एक सैन्य-राजनयिक स्रोत ने रूस की TASS समाचार एजेंसी को बताया कि 2018 में चीन को एस-400 मिसाइल का पहला बैच मिला।

इन देशों की एस-400 पर नजर

वर्तमान में रूस, बेलारूस और तुर्की में भी एस-400 रक्षा प्रणाली है। भारत ने 2018 में 5.4 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए और उसे 2021 तक अपना पहला एस-400 मिलने की संभावना है। कई अन्य देशों ईरान, इराक, सऊदी अरब, कतर, वियतनाम, मोरक्को ने रूसी मिसाइल सिस्‍टम को खरीदने में रुचि व्यक्त की है। बीजिंग ने कथित तौर पर एस-400 के एक जोड़े का आदेश दिया था।

एस-400 की खासियत

एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को रूस में अपनी तरह का सबसे उन्नत माना जाता है, जो 400 किलोमीटर की दूरी और 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक लक्ष्य को नष्ट करने में सक्षम है। रूस द्वारा चीन को एस-400 मिसाइलों को रोक लगाने से पहले मास्को ने बीजिंग पर जासूसी करने का आरोप लगाया था। सेंट पीटरबोरह आर्कटिक सोशल साइंसेज अकादमी के अध्यक्ष वालेरी मिट्को ने रूस द्वारा चीनी अधिकारियों को वर्गीकृत जानकारी सौंपने का आरोप लगाया है।

भारत की भूमिका

इस कदम को निश्चित रूप से भारत के लिए एक लाभ के रूप में देखा जा सकता है। नई दिल्ली नियमित रूप से मॉस्को से बात कर रही है। भारत रूस से स्पेयर पार्ट्स, गोला-बारूद और हथियार खरीदना चाह रहा है और अधिग्रहण की अनुमानित लागत 1 बिलियन डॉलर से अधिक है। इसलिए चीन को एस-400 पर रूस के ठहराव से भारत के लिए तकनीकी लाभ हो सकता है।

ऐसे में एक बार फिर से रूस ने दिखा दिया की वो भारत का सच्चा दोस्त है और हर वक्त भारत के साथ खड़ा है। वही राफेल के भारत आने से भारत की ताकत और मजबूत हुई है। जिससे अब ये कहा जा सकता है कि प्रशांत महासागर में भारत लगातार एक ताकतवर देश के रूप में उभर रहा है और वो इसलिये क्योंकि जब से मोदी सरकार दिल्ली में बनी है उसने सेना के लिए हथियार खरीदने में आनाकानी नही की है और उसी का असर है कि विश्व में भारत की छवि निखरकर एक शक्तिशाली देश के तौर पर हो रही है।


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