2019 के बही खाते में देश को फाइव ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने का रोडमैप

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Union_Budget_2019

देश के वित्त व्यवस्था का लेखा जोखा और आने वाले भविष्य की आर्थिक रूपरेखा तय करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट पेश किया| इस बजट की ख़ास बात थी कि, इसमें भारत को विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का रोडमैप भी शामिल था|

संसद में बजट प्रस्तुत करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा, “इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था तीन ट्रिलियन डॉलर की ऊंचाई को छु लेगी और ये प्रधानमंत्री के विज़न के मुताबिक 2024-25 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है|” उन्होंने कहा कि एक ट्रिलियन डॉलर की ऊंचाई छूने में देश की अर्थव्यवस्था को 55 साल लगे| पिछले पांच साल में सरकार ने एक ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि करके इसे 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाया| पांच साल पहले भारत विश्व की ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जो अब छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है|

अगले एक दशक में नए भारत की रूपरेखा तय करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि, “पिछले पांच सालों में जितने मेगा प्रोग्राम और सर्विस शुरू किये गए उन्हें और तेजी से बढाया जायेगा| उन्होंने कहा कि सरकार की योजना तकनीक का सर्वोत्तम इस्तेमाल कर के अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है|

निजी क्षेत्र के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र का बहुत बड़ा योगदान है, वही देश के “वेल्थ क्रिएटर” हैं| अगले दस सालों के लिए सरकार ने जो एजेंडा बनाया है वो इस प्रकार है:

• इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (सड़क, रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग का विकास)
• अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में डिजिटल इंडिया की पहुँच
• MSME, स्टार्टअप, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और मेडिकल इक्विपमेंट के क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना
• ब्लू इकॉनमी को तरजीह
• स्पेस प्रोग्राम्स में तेजी
• खाद्यान के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं इनके निर्यात में बढ़ोतरी
• स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ख़ास ध्यान
• मिनिमम गवर्मेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस का लक्ष्य

इसके बारे में विस्तृत बात करते हुए निर्मला सीतारमण ने फाइव ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को पाने के लिए “इन्वेस्टमेंट बेस्ड ग्रोथ मॉडल” को अपनाने पर बल दिया| साथ ही उन्होंने ये भी कहा की इस मॉडल को सफल बनाने के लिए लो-कॉस्ट कैपिटल की आवश्यकता है| ऐसा अनुमान है कि भारत को प्रति वर्ष औसतन करीब बीस लाख करोड़ (300 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के निवेश की आवश्यकता है|

 


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