मोदी राज में देश में फैल रहा सड़कों का जाल

जिस देश की परिवहन व्यवस्था बेहतर होती है वो देश तेजी के साथ विकास के आयाम को भी छूता है। कुछ ऐसी ही सोच अटल जी की सरकार की भी थी जिसके चलते उन्होने देश में सड़क व्यवस्था को ठीक करने के लिये स्वर्णिम चतुर्भुज की शुरूआत की थी। हालाकि उनकी सरकार जाने के बाद ये योजना सिर्फ कागज में देखी जा सकती थी लेकिन सत्ता में मोदी जी के आने के बाद इस योजना को फिर से आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत माला परियोजना के चलते अटल जी के सपने को और बल दिया जा रहा है। जिस तरह से देश में नये नये राजमार्ग तैयार हो रहे है ये इस बात की गवाही भी दे रहे है।

मुंबई से कन्याकुमारी तक बनेगा आर्थिक गलियारा

सत्ता में आने के बाद ही मोदी सरकार नये नये राजमार्ग बनवाने में जुट गई थी जिसकी गति अभी भी तेजी के साथ चल रही है। दिल्ली से मुंबई के लिये विशेष राजमार्ग भारत माला योजना के तहत  निर्माण तेजी से हो रहा है। अब मोदी सरकार भारत माला परियोजना के तहत मुंबई- कन्याकुमारी आर्थिक गलियारे के हिस्से के तौर पर 50,000 करोड़ रुपये की राजमार्ग परियोजनाओं को विकसित करने जा रही है। खास बात ये है कि इस योजना के तहत केरल के लिये 11,571 करोड़ रुपये की सात राजमार्ग परियोजनाओं पर भी काम किया जायेगा जिसका शिलान्यास भी कर दिया गया है। नये भारत के दृष्टिकोण के मुताबिक विश्वस्तरीय परिवहन सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है इसके लिये भारतमाला परियोजना जैसी पहल की गई हैं। इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा ढांचागत विकास कार्यक्रम माना जा रहा है। सागरमाला योजना के तहत 119 किलोमीटर की बंदरगाह सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की भी योजना है। भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेसवे, दिल्ली- अमृतसर कटरा एक्सप्रेसवे, चेन्नई- बेंगलूरू एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख गलियारे को विकसित किया जा रहा है।

कोरोना काल में भी सरपट दौड़ती सरकार

जहां एक तरफ कोरोना काल के चलते दुनिया में ब्रेक लग गया हो लेकिन मोदी सरकार ने इस दौरान भी विकास के मिशन में पीछे नही हटी जिसका असर ये हुआ कि जहां एक तरफ देश की सीमाओं पर 44 नये पुल बनकर तैयार हुए तो दूसरी तरफ देश के गांव भी तेजी के साथ सड़क से जुड़े ऑकड़ो पर गौर करे तो कोरोना काल में सरकार ने 3 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण किया।  जो पहले करीब 2500 किलोमीटर के पास होता था। इससे साफ होता है कि विकास के कामो को अटकाना, भटकाना की व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। सरकार के इस कदम से जहां गांव शहरों से जुड़े है तो लोगों का सफर भी अब कम वक्त में पूरा हो रहा है।

भारतमाला हो या फिर दूसरी योजना जिस तरह से सरकार इस योजना के तहत तय समय पर काम कर रही है उससे यही लगता है कि नया भारत तेजी से रफ्तार भरेगा जिससे देश का कारोबार ही नही बल्कि आर्थिक मोर्चे पर देश तेजी से आगे चलेगा। लेकिन एक सवाल जरूर उठता है कि अगर मोदी सरकार ये कर सकती है वो भी इतने विषम समय में तो पहले की सरकारे ऐसा क्यो नही कर पाई। आपको ऐसे सवाल के साथ छोड़ रहा हूं और आशा करता हूं आप इसका सही जवाब खुद ब खुद समझ जायेंगे।

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