ISRO फिर इतिहास रचने को तैयार, RISAT-2BR1 की लॉन्चिंग आज- बनेगा अंतरिक्ष में भारत का दूसरा खुफिया आंख

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RISAT2BR1

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ISRO ) आज देश के एक नए जासूसी उपग्रह रीसैट-2बीआर1 ( RISAT2BR1 ) और 9 विदेशी उपग्रहों को लांच करेगा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से यह उपग्रह लांच किया जाएगा।

रिसैट-2बीआर1 ( RISAT2BR1 ) के प्रक्षेपण से भारत की ताकत पहले से और अधिक बढ़ जाएगी। इसरो (ISRO) ने बताया कि रिसैट-2बीआर1 मिशन की लाइफ 5 साल है।

बुधवार को होने जा रहा यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के लिए महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा कि PSLV रॉकेट की 50वीं उड़ान है और श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाने वाले 75वां रॉकेट होगा। पीएसएलवी-सी48 श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्चपैड से बुधवार को दोपहर 3 बजकर 25 मिनट पर उड़ान भरेगा।

RISAT2BR1 एक रडार इमेजिंग निगरानी उपग्रह है। इस उपग्रह का वजन 628 किलोग्राम है। यह उपग्रह बादलों और घने अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकेगा। इसमें लगे खास सेंसरों के चलते सीमापार आतंकियों के जमावड़े की भी सूचना पहले ही मिल जाएगी।

साथ ही सीमापार की गतिविधियों का विश्लेषण भी आसान हो जाएगा। 22 मई को लांच की गई आरआईसैट-2बी पहले से ही देश की खुफिया आंख के तौर पर निगरानी का काम कर रही है।

लांच से पहले इसरो चीफ पहुंचे तिरुपति

पीएसएलवी सी-48 के बुधवार को उड़ान भरने से पहले इसरो चीफ डा. के सिवन मंगलवार को यहां तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचे। सिवन ने भगवान के दर्शन करने के साथ ही पूजा भी की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से वार्ता में कहा कि पीएसएलवी सी-48 की लांचिंग इसरो के लिए ऐतिहासिक पल होगा, क्योंकि यह इस रॉकेट की 50वीं और श्रीहरिकोटा लांचिंग स्टेशन से किसी रॉकेट की 75वीं उड़ान होगी।

RISAT2BR1 की खासियत

• 05 साल तक सीमाओं की निगरानी करेगी यह सैटेलाइट
• 628 किलोग्राम का रखा गया है इस सैटेलाइट का वजन
• 100 किलोमीटर इलाके की तस्वीर एक साथ ले पाएगी
• यह सैटेलाइट दिन और रात में एक जैसी निगरानी करेगी
• माइक्रोवेव फ्रीक्वेंसी पर काम करेगी यह सैटेलाइट
• एक्स बैंड एसएआर कैपेबिल्टी के चलते हर मौसम में साफ तस्वीर देगी
• स्वदेश में बने खास डिफेंस इंटेलिजेंस सेंसर से युक्त है

इस सैटेलाइट के साथ पीएसएलवी कुल दस सैटेलाइट लेकर अंतरिक्ष में जाएगा जिनमें 9 विदेशी सैटेलाइट हैं। इनमें इजराइल, इटली, जापान का एक-एक और अमेरिका के 6 उपग्रह शामिल होंगे। इसरो ने अब तक 310 विदेशी उपग्रहों को कक्षा में प्रवेश कराया और अगर 11 दिसंबर का मिशन सफल हुआ तो यह संख्या 319 हो जाएगी।

इस अभियान में इसरो पीएसएलवी सी-48 के जरिये इस्राइल के तीन छात्रों की तरफ से डिजाइन की गई ‘डूचीफैट-3’ सैटेलाइट को भी लांच करेगा। दक्षिण इस्राइल के अशांत गाजा पट्टी क्षेत्र से महज एक किमी दूर स्थित शा हनेगेव हाईस्कूल के इन तीनों छात्रों एलोन अब्रामोविच, मीतेव असुलिन और शमुएल अविव लेवी की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच है। इन्होंने इस सैटेलाइट को हर्जलिया साइंस सेंटर और अपने स्कूल के साथ मिलकर बनाया है। छात्रों के मुताबिक, इस रिमोट सेन्सिंग फोटो सैटेलाइट से देश भर के बच्चों को पृथ्वी को देखने और विश्लेषण करने की सुविधा मिलेगा।

 


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