MSP पर फैले भ्रम को दूर करते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ की फसल पर MSP को बढ़ाया

पीएम मोदी ने संसद भवन में साफ साफ बोला था कि MSP थी MSP है और MSP आगे भी रहेगी इस वायदे को वो लगाता पूरा भी कर रहे है। जिसके चलते सरकार ने खरीफ की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने का फैसला किया है जिसका सीधा फायदा किसानों को होगा।

खरीफ की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य किया इजाफा

देश भर में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर मोदी विरोधियों ने किसानों के सामने बहुत अफवाह उड़ाई थी। कि सरकार इसे खत्म करने वाली है विरोधी किसानों के बीच जाकर बोलते थे कि सरकार मंडिया खत्म कर देगी जिसके बाद MSP भी खत्म हो जायेगा। लेकिन उल्टा किसान अब देख रहे है कि सरकार लगातार MSP में इजाफा कर रही है। जिससे किसानो की हाल सुधरे इसी क्रम में खरीफ फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने का फैसला किया है। जिसके बाद धान पर MSP 72 रूपये की बढ़ोत्तरी की गई है। इस ब़ढ़ोत्तरी के बाद  1868 रुपये प्रति क्विंटल से धान अब 1940 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके साथ ही, बाजरा पर MSP बढ़ाकर 2150 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर अब 2250 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसी तरह तिल की फसल में 452 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी की गई है जबकि तुअर और उड़द की दाल में 300 रुपये MSP की पुरानी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

आंदोलकारी किसानों से बात करने को सरकार तैयार

MSP में बढ़ोत्तरी के साथ सरकार ने साफ किया कि किसान की आमदनी कैसे बढ़े इसके लिये सरकार लगातार 7 सालो से काम कर रही है। इतना ही नहीं सरकार किसानों के लिये लगातार नये नये रोडमैप तैयार करने में लगी है कि कैसे किसान की आय तेजी के साथ बढ़ सके। लेकिन कुछ लोग है जो सरकार को बदनाम करके किसानों को गुमराह करके आंदोलन करवा रहे है ऐसे लोगों से किसानों को सावधान रहना चाहिये। इस बीच सरकार ने साफ किया इसके बावजूद भी केंद्र सरकार आंदोलनकारियों से बात करने के लिये तैयार है और सरकार चाहती है किसान आंदोलन खत्म करके देश के विकास में तेजी से भागीदार बने। गौरतलब है कि सरकार ने किसानों से करीब 11 बार बातचीत हो चुकी है। लेकिन सब बैठक विफल रही और इसका सबसे बड़ा कारण किसान यूनियनों की हठ भी है। ये सबने देखा भी है।

वैसे बोलते भी है ना कि किसी भी मसले का हल तभी निकलता है जब दोनो पक्ष अपनी अपनी बातो से कुछ पीछे हटे। वैसे किसान बिल को लेकर सरकार कई बार बहुत पीछे हट चुकी है। लेकिन यूनियन हठ में ही लगी है कि कानून खत्म किया जाये। जबकि नये कानून से कैसे किसानो को फायदा हो रहा है इसकी खबर पंजाब सहित कई प्रदेशो से आने भी लगी है किस तरह मंडी से ज्यादा दाम बाहर किसानों को मिला है ये साबित भी हो चुका है। ऐसे किसान युनियनों को हठ छोड़ कर सरकार से बात करनी चाहिये और मसले का हल जल्द निकालना चाहिये जिससे किसान तेजी से आगे बढ़ सके। क्योकि किसान आगे बढ़ेगा तभी देश भी आगे बढ़ेगा और इस बात से कोई परहेज नही कर सकता है।