आरोग्य सेतु ऐप में निकालो खामी, बदले में पाओ इनाम

कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकार ने वैसे तो कई कदम उठाये है जिसका असर आज ये देखा जा रहा है कि भारत में इस मामारी से मरने वालो का प्रतिशत समूची दुनिया में सबसे कम है। लेकिन देशवासियों को इस वायरस से बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले अरोग्य सेतु ऐप पर कुछ लोग सवालिया निशान लगा रहे थे अब सरकार ने आरोग्य सेतु एप में गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए स्रोत कोड को खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही सुरक्षा खामियों को खोजने के लिए इनाम का ऐलान भी किया।

सबसे बड़ा ओपन सोर्स ऐप

आरोग्य सेतु पर वैसे कितने भी सवाल खड़े किये गये हो लेकिन देश की जनता को अपने इस बॉडीगार्ड पर पूरा पूरा यकीन है तभी तो करीब 10 करोड देशवासियो ने इसे अपनाया है। लेकिन इस पर सवाल खड़े करने वालो को अब करारा जवाब देने के लिये सरकार ने खुला ऐलान किया है क्योकि साच को आच कहाँ इसके साथ साथ सरकार ने उन लोगो को इनाम भी देने की बात कही है जो इसका बग या इसमे आ रही खामी को दूर करने की सलह देगे। नीति आयोग की टीम की ओर से कहा गया है कि iOS वर्जन का सोर्स कोड भी अगले दो सप्ताह में रिलीज कर दिया जाएगा। आरोग्य सेतु ऐप की ओपन-सोर्सिंग करना अपने आप में खास है क्योंकि किसी दूसरे गवर्मेंट प्रॉडक्ट को दुनियाभर में कहीं भी इतने बड़े स्केल पर ओपन सोर्स नहीं किया गया है। आरोग्य सेतु के सभी प्लैटफॉर्म्स पर कुल मिलाकर अब तक 11.5 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि ऐप ने 1,40,000 से ज्यादा यूजर्स को कोरोना वायरस से रिस्क ले अलर्ट किया है।

कुल तीन लाख रुपये के इनाम

बग बाउंटी प्रोग्राम की शुरुआत भी इस ऐप को बेहतर बनाने के लिए की गई है और ऐप में कोई सुरक्षा से जुड़ी खामी का पता लगाने पर कुल 3 लाख रुपये तक के कैश रिवॉर्ड दिए जाएंगे। इसके अलावा क्वालिफाई करने वाले सभी सबमिशंस को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा और बग या सिक्यॉरिटी रिस्क के आधार पर अवॉर्ड दिए जाएंगे। इन प्रोग्राम में केवल भारत के रिसर्चर्स हिस्सा ले पाएंगे, भारत से बाहर के रिसर्चर्स अगर सबमिशन भेजते हैं तो उन्हें सर्टिफिकेट मिलेगा लेकिन उन्हें रिवॉर्ड नहीं मिलेगा। 27 मई से शुरू किया गया यह प्रोग्राम 26 जून तक चलेगा।

मतलब साफ है कि सरकार जनता के सामने दूध का दूध पानी का पानी करने को तैयार है ऐसे उन लोगो को जरूर सोचना चाहिये जो इस ऐप पर सवालिया निसान लगा रहे थे और लोगो को निजता और मौलिक अधिकार के हनन का पाठ पढ़कर इसे इस्तेमाल न करने की सिफारिश कर रहे थे लेकिन अब वो भी आकर इस आयोजन का हिस्सा बन सकते है और अपनी बात साबित कर सकते है लेकिन अगर बात झूठी साबित हुई तो क्या वो इसको लेकर देशवासियों के सामने माफी मांगेंगे या फिर सिर्फ दाँत दिखाकर निकल लेंगे।