शास्त्रीजी वो नाम जो थे सादगी की मूर्ति

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शायद मुझसे भूल नही हो रही होगी, तो देश के दिग्गज नेताओ में सबसे छोटे कद के नेता लाल बहादुर शास्त्री ही थे। जिनका कद जरूर छोटा था, लेकिन इनकी सोच राष्ट्रहित के लिये हिमालय से भी बड़ी थी। जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि आज है। इसी मौके पर उनकी सादगी की कुछ मशहूर किस्सों से आपका तारूफ करवाता हूँ:

सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग नहीं

शास्त्रीजी के बेटे सुनील शास्त्री ने अपनी किताब ‘लाल बहादुर शास्त्री, मेरे बाबूजी’ में देश के पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन से जुड़े कई आत्मीय प्रसंग साझा किए हैं। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है, कि उनके पिता सरकारी खर्चे पर मिली कार का प्रयोग नहीं करते थे। एक बार उन्होंने अपने पिता की कार चला ली, तो उन्होंने किलोमीटर का हिसाब कर पैसा सरकारी खाते में जमा करवाया था।

तोहफे में नही ली मंहगी साड़ी

ये उस वक्त का किस्सा है जब एक बार शास्त्रीजी  अपनी पत्नी और परिवार की अन्य महिलाओं के लिए साड़ी खरीदने मिल (साड़ी की फैक्टरी) गए थे। उस वक्त वह देश के प्रधानमंत्री भी थे। मिल मालिक ने उन्हें कुछ महंगी साड़ी दिखाई, तो उन्होंने कहा कि उनके पास इन्हें खरीदने लायक पैसे नहीं हैं। मिल मालिक ने जब साड़ी गिफ्ट देनी चाही, तो उन्होंने इसके लिए सख्ती से इनकार कर दिया और अपने बजट के हिसाब से साड़ी खरीद कर घर गये.

घर से हटवाया सरकारी कूलर

शास्त्रीजी मन और कर्म से पूरे गांधीवादी थे। एक बार उनके घर पर सरकारी विभाग की तरफ से कूलर लगवाया गया। तब उन्होने अपने परिवार से कहा,  ‘इलाहाबाद के पुश्तैनी घर में कूलर नहीं है। कभी धूप में निकलना पड़ सकता है। ऐसे आदतें बिगड़ जाएंगी।’ उन्होंने तुरंत सरकारी विभाग को फोन कर कूलर हटवा दिया।इस बात को सभी जानते है कि वे सरकारी वस्तुओं का इस्तेमाल बहुत कम करते थे। 

अकाल के वक्त खुद रखा उपवास

अकाल के दिनों में जब देश में भुखमरी की विपत्ति आई तो शास्त्रीजी ने कहा कि देश का हर नागरिक एक दिन का व्रत करे तो भुखमरी खत्म हो जाएगी। खुद शास्त्रीजी नियमित व्रत रखा करते थे और परिवार को भी यही आदेश था। जिसके बाद आप खुद जानते है कि देश में किस तरह से कृषि क्रान्ति हुई और आज देश पूरी तरह से अनाज के मामले में आत्मनिर्भय है।

हरी घास सबसे ज्यादा पंसद

शास्त्रीजी के बेटे सुनील शास्त्री ने की माने तो शास्त्रीजी की टेबल पर हमेशा हरी घास रहती थी। एक बार उन्होंने बताया था, कि सुंदर फूल लोगों को आकर्षित करते हैं, लेकिन कुछ दिन में मुरझाकर गिर जाते हैं। घास वह आधार है जो हमेशा रहती है। मैं लोगों के जीवन में घास की तरह ही एक आधार और खुशी की वजह बनकर रहना चाहता हूं।’

पुराने कुर्ता से बनाते थे रुमाल

शास्त्रीजी बहुत कम साधनों में अपना जीवन जीते थे। वह अपनी पत्नी को फटे हुए कुर्ते दे दिया करते थे। उन्हीं पुराने कुर्तों से रूमाल बनाकर उनकी पत्नी उन्हें प्रयोग के लिए देती थीं।इसी तरह पीएम रहते हुए भी वो ज्यादातर रेल से सफर करते थे और विदेश दौरे के वक्त ज्यादा लोगों के साथ साथ परिवार के लोगो को भी अपने साथ नही ले जाते थे। खुद जब ताशकंद पीएम गये थे तो वो अपनी धर्मपत्नी को सिर्फ इसलिये नही ले गये थे क्योकि उनके पास गर्म कपड़े नही थे इसके साथ उनके निधन के बाद जब उनके खाते में रकम देखी गई तो लोग सन्न रह गये क्योकि उनके खाते में महज 10 रूपये ही निकले थे।

मतलब साफ है, कि भारत में शास्त्रीजी जैसा नेता न हुआ और न होगा, जो सिर्फ देश के लिए जिये और देश के लिये ही मरे.. ऐसे देश के दूसरे पीएम शास्त्रीजी को शत् शत् नमन..


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